लखनऊ

कभी रहे मायावती के ‘भरोसेमंद’ और अब पार्टी से हुए दोबारा निष्कासित; आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ कौन हैं?

About Ashok Siddharth: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। जानिए अशोक सिद्धार्थ के बारे में।
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Aug 02, 2026
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आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के बारे में। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

About Ashok Siddharth:उत्तर प्रदेशमें बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने संगठन में अनुशासन को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ और वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया है। मायावती ने दोनों नेताओं पर पार्टी के दिशा-निर्देशों की अनदेखी और लगातार अनुशासनहीनता के आरोप लगाए हैं।

अशोक सिद्धार्थ को दोबारा पार्टी से निकाला गया

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X जारी बयान में बताया कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण और प्रदेश नेतृत्व के साथ तालमेल की कमी के कारण पार्टी से बाहर किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें इस शर्त पर दोबारा पार्टी में शामिल किया गया था कि वे भविष्य में अनुशासन का पालन करेंगे। साथ ही यह भी तय किया गया था कि उन्हें उत्तर प्रदेश में नहीं, बल्कि केवल अन्य राज्यों में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी दी जाएगी।

कई राज्यों से मिली अनुशासनहीनता की शिकायतें

BSP प्रमुख के अनुसार, पार्टी में वापसी के बाद अशोक सिद्धार्थ को जिन राज्यों की जिम्मेदारी दी गई, वहां भी उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी लगातार पार्टी निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता की शिकायतें मिलती रहीं। कई बार चेतावनी देने के बावजूद सुधार नहीं होने पर पहले उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और अब पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया है।

UP वापसी की खबरों को बताया साजिश

मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ की उत्तर प्रदेश में वापसी की खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही थीं ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा हो और 2027 के विधानसभा चुनाव अभियान को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी और आंदोलन के हित में अशोक सिद्धार्थ को अब स्थायी रूप से निष्कासित किया गया है और भविष्य में उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।

रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी गिरी गाज

BSP ने वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की है। मायावती के मुताबिक, बेनीवाल को पंजाब के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की भी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन उनके खिलाफ भी लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं कारणों से उन्हें भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर कर दिया गया।

पंजाब की जिम्मेदारी फिर रामजी गौतम को

संगठन में हुए बदलाव के तहत राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय समन्वयक रामजी गौतम को अन्य राज्यों के साथ एक बार फिर पंजाब का प्रभारी बनाया गया है।मायावती ने कहा कि रामजी गौतम आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि अगले लोकसभा चुनाव तक भी इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।

यूपी के नेताओं को नहीं मिलेगी प्रदेश की जिम्मेदारी

बसपा प्रमुख ने पार्टी की नई रणनीति का भी खुलासा किया।उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी और समन्वयक अन्य राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें भविष्य में उत्तर प्रदेश में कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यह फैसला पार्टी की नीति का हिस्सा है।

कार्यकर्ताओं और मीडिया से की अपील

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे लोगों से सावधान रहें जो अफवाह फैलाकर BSP के चुनावी अभियान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि बिना पुष्टि के किसी भ्रामक या गलत जानकारी का प्रचार न करें और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करें।

उम्मीदवार चयन पर मायावती ने फिर दोहराया अपना रुख

हाल ही में ऐसी चर्चाएं थीं कि बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को उम्मीदवार चयन की जिम्मेदारी दी गई है। मायावती ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का अंतिम फैसला वही करेंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में इस विषय को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?

अशोक सिद्धार्थ लंबे समय तक BSP के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते रहे हैं। उन्हें मायावती का करीबी नेता माना जाता रहा है। उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया। मायावती ने पहले उन्हें विधान परिषद (MLC) भेजा और बाद में वर्ष 2016 में राज्यसभा सदस्य बनाया। उनका कार्यकाल 2022 तक रहा।

पेशे से डॉक्टर, लंबे समय तक संगठन में निभाई भूमिका

अशोक सिद्धार्थ दलित समुदाय से आते हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की तथा महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से नेत्र रोग (ऑफ्थैल्मोलॉजी) में डिप्लोमा किया। उनकी पत्नी मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

2027 चुनाव से पहले अनुशासन पर जोर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा संगठन में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश देना चाहती है। हालिया कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे संगठन को मजबूत करते हुए चुनावी तैयारियों को गति दी जा सके।