
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी कैबिनेट में सहयोगी रहे पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर का राज़ सामाजिक सम्मेलन के दौरान खोलकर रख दिया। जिसके बाद राजभर से अंदर की बातचीत जानने के लिए लोग उत्सुक हैं। लेकिन अब तक ओम प्रकाश राजभर ने कोई जवाब नहीं दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुभासपा के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस बार अखिलेश यादव से हाथ मिलकार भाजपा के खिलाफ प्रचार शुरू कर दिया है।
सामाजिक सम्मेलन में योगी ने किया खुलासा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम लिये बिना ओमप्रकाश राजभर पर कहा कि वो लोग ऐसे हैं कि मौके की तलाश में ही रहते हैं। उन्हें गाँव में प्रधान भी अपने परिवार का चाहिए। बाप को मंत्री बनना है। एक बेटे को सांसद तो दूसरे बेटे को एमएलसी बनना चाहते थे। लेकिन हमारी पार्टी परिवार के विकास वाली नहीं है।
राजनीतिक ब्लैकमेलरों की दुकान बंद करानी होगी। ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है। महाराज सुहेलदेव के स्मारक का विरोध करने वाले की सोच परिवार के विकास तक सीमित है। ऐसे लोग क्या समाज का विकास करने योग्य हैं?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मुहम्मद गोरी और आक्रांता गाजी के अनुयायी वोट बैंक के भय से हिन्दू रक्षक महाराजा सुहेलदेव के नाम से डरते हैं। इनको भय है कि सुहेलदेव का स्मारक बनने के बाद लोग गाजी को भूल जाएंगे। जनता राजनीतिक ब्लैकमेलरों को कूड़े में फेंक देगी। इसी भय से वह राष्ट्र रक्षक सुहेलदेव के स्मारक का अप्रत्यक्ष रूप से विरोध कर रहे थे।
सुहेलदेव का नाम लेने से डरते हैं मुहम्मद गोरी और गाजी के अनुयायी
पूर्व मंत्री एवं सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर का नाम लिये बिना मुख्यमंत्री योगी ने कड़ा हमला बोलते हुए कहा मेरी कैबिनेट में राजभर समाज के दो मंत्री थे। कैबिनेट की बैठक में एक मंत्री ने बहराइच में बनने वाले महाराजा सुहेलदेव के स्मारक प्रस्ताव का विरोध किया था। जबकि अनिल राजभर चाहते थे भव्य स्मारक बने। आज बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बन रहा है।
कहा कि भाजपा सरकार ने बहराइच मेडिकल कॉलेज का नाम महाराजा सुहेलदेव के नाम पर किया है। विपक्षी दलों से पूछा जाना चाहिए कि इन दलों ने महाराजा सुहेलदेव के लिए क्या किया? जबकि देश पर सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस ने सैकड़ों स्मारक का नामकरण नेहरू खानदान के नाम पर किया। सपा और बसपा को भी यूपी में चार-चार बार शासन करने का मौका मिला लेकिन एक भी स्मारक का नामकरण सुहेलदेव के नाम पर नहीं किया।
कमरे में क्या बात हुई थी?
योगी के इस बयान में खुलासे के बाद से लोगों के बीच चर्चा है कि राजभर अपने परिवार के हर सदस्य के लिए बड़े पद और टिकट चाह रहे थे। जिसका विरोध भाजपा ने किया था। वहीं ओम प्रकाश राजभर पहले कई बार कह भी चुके थे। कि सरकार में अगर कैबिनेट मंत्री किसी डीएम का ट्रान्सफर तक न करा पाए तो क्या फाइदा।