
Divyang Pension Increase in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथने दिव्यांगजनों की पेंशन को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले कुछ दिनों में दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में और बढ़ोतरी करने जा रही है।
CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगजनों को पहले 300 रुपये की पेंशन मिलती थी। उनकी सरकार ने पहले इस राशि को बढ़ाकर 500 रुपये किया और बाद में पेंशन की रकम बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दी गई। उन्होंने कहा कि अब सरकार दिव्यांगजनों की पेंशन में एक बार फिर वृद्धि करने की तैयारी में है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए CM योगी ने कहा, '' 2015 में PM नरेंद्र मोदी ने विकलांग शब्द हटा कर के दिव्यांग शब्द को जोड़ा था।'' उन्होंने कहा कि ये केवल एक शब्द बदलने की बात नहीं थी। ये दृष्टिकोण का परिचय देता है। जैसी दृष्टि वैसी ही सृष्टि। अच्छा देखेंगे और अच्छा भाव रखेंगे तो परिणाम भी अच्छा ही आएगा। दिव्यांगजन कल्याण विभाग लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है।
CM योगी ने कहा कि आज डबल इंजन की ये सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार के लिए उनके सम्मान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को सरकारी नौकरी में अच्छे अवसर मिले।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में श्री गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह’ में शामिल हुए।
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंदू समाज को लेकर कहा कि हिंदू समाज की ताकत उसकी जीवंतता में निहित है। हिंदू समाज में अपनी विसंगतियों और विकृतियों के परिमार्जन की सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज की एकता के लिए प्रचंड हिंदुत्व के वेग को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे, जबकि महंत अवैद्यनाथ ने सामाजिक समता के आधार पर बिखरी हिंदू शक्ति को एकजुट करने के लिए जीवनभर प्रयास किया।
सीएम योगी ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ ने हिंदू समाज में सामाजिक समता स्थापित करने और बिखरी हुई हिंदू शक्ति को एकजुट करने के लिए लगातार प्रयास किया। इसी अभियान का एक हिस्सा सहभोज भी था। उन्होंने कहा कि दोनों संतों ने अपने-अपने समय में हिंदू समाज की एकता और मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में रामलला का प्रकटीकरण हुआ। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सानिध्य में विश्व हिंदू परिषद ने राष्ट्रीय राम जन्मभूमि मुक्ति समिति का गठन किया, जिसकी जिम्मेदारी महंत अवैद्यनाथ ने संभाली।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ ने संतों को साथ लेकर राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने इसे गुरु परंपरा का विस्तार बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, समय, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता के अनुरूप विचारों को आगे बढ़ाकर उन्हें लोकोपयोगी बनाना महापुरुषों का गुण होता है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ इसी चिंतन को आगे बढ़ाती रहेगी।