लखनऊ

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अपने ही विभाग पर उठाए सवाल, मरने के बाद CMO का ट्रान्सफर क्यों?

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अपने ही अधीन आने वाले विभागों के ट्रान्सफर पर बड़ा सवाल उठाया है। जिसमें कई डॉक्टर और सीएमओ के ट्रान्सफर तब किए गए जब उनकी डेथ हो गई। ऐसे में बड़ा सवाल है कि, इतने बड़े स्तर पर सीएमओ और डॉक्टर के ट्रान्सफर क्यूँ रूके जाते थे? क्या इसके पीछे लेन देन या भ्रष्टाचार है? ऐसे सवालों में फ़िलाहल उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग फंसा हुआ है।

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Jul 05, 2022
File Photo of Deputy CM Yogi Adityanath

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के पास रहने वाला ये विभाग और इसके अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर पिछले कई सालों से चर्चा में रहा है। लेकिन योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जैसे ही बृजेश पाठक डिप्टी सीएम बनें हैं। तब से इसमें सुधार जारी है। यही कारण है कि इस बार हुए ट्रान्सफर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने खुद ही सवाल उठाते हुए प्रमुख सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग उन्हीं के प्रभार में है। सोमवार को उन्होंने विभाग के अपर मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। जारी लेटर में उन्होंने सत्र में सभी ट्रांसफर के कारण सहित डिटेल देने के लिए कहा है।


यूपी स्वास्थ्य विभाग की ट्रान्सफर नीति से परेशान डिप्टी सीएम
डिप्टी सीएम की ये नाराजगी इसलिए है, क्योंकि इन ट्रांसफर में तबादला नीति को अनदेखा किया गया है। अब इस मामले में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन रिपोर्ट तैयार करके डिप्टी सीएम के सामने रखेंगे। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में होने वाले ट्रांसफर पोस्टिंग में दो अधिकारियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। जिसमें प्रमुख तौर पर नाम विभागीय सचिव रविंद्र कुमार का है। जो लिस्ट को सिलैक्ट करके फ़ाइनल करते हैं। जबकि दूसरे नंबर पर ये लिस्ट फ़ाइनल करते हुए अपर मुख्य सचिव अमित मोहन के पास आती है। जिसे वो जारी करते हैं।


अब अगर जांच हुई तो इसकी आंच इस बार ऊपर तक जरूर जाएगी। जिससे किस सीएमओ और किस डॉक्टर की पोस्टिंग किसके कहने पर और क्यों रोकी गई थी इसका खुलासा भी होगा।

Updated on:
05 Jul 2022 12:51 pm
Published on:
05 Jul 2022 12:48 pm
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