FakeIPLTickets: लखनऊ पुलिस ने फर्जी आईपीएल टिकट बेचने वाले अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है। आरोपी सोशल मीडिया, डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर और AI टूल्स की मदद से नकली टिकट तैयार करते थे।
IPL Ticket Scam : आईपीएल मैचों का रोमांच जहां क्रिकेट प्रेमियों के सिर चढ़कर बोल रहा है, वहीं इसी उत्साह का फायदा उठाकर लोगों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का Lucknow Police Commissionerate ने बड़ा खुलासा किया है। साइबर सेल और थाना सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी आईपीएल टिकट तैयार कर लोगों को बेच रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से असली टिकटों की तस्वीर डाउनलोड कर उन्हें एडिट करते थे और हूबहू असली जैसा नकली टिकट तैयार कर मोटी रकम वसूलते थे। इस पूरे फर्जीवाड़े में आधुनिक तकनीक, डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और संगठित गिरोह के रूप में अलग-अलग राज्यों में जाकर नकली आईपीएल टिकट बेचने का काम करते थे। पूछताछ में पता चला कि आरोपी Facebook, Instagram और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से असली टिकटों की तस्वीरें डाउनलोड करते थे। इसके बाद उन तस्वीरों को कंप्यूटर में एडिट कर नई फर्जी टिकट तैयार की जाती थी। गिरोह टिकट की डिजाइन, रंग, लोगो, सीट नंबर और QR कोड तक को असली जैसा दिखाने की कोशिश करता था ताकि कोई आसानी से शक न कर सके।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी Corel Draw एप्लीकेशन की मदद से टिकटों की डिजाइन तैयार करते थे। टिकट की साइज, फॉन्ट और प्रिंट क्वालिटी को बिल्कुल असली जैसा बनाने के लिए काफी बारीकी से काम किया जाता था। इतना ही नहीं, आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया कि टिकट डिजाइन को वास्तविक रूप देने और लेआउट समझने के लिए उन्होंने ChatGPT जैसे AI टूल्स की भी मदद ली थी। टिकटों को 170 GSM क्वालिटी पेपर पर प्रिंट किया जाता था ताकि उनका लुक और फील असली टिकट जैसा लगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पहली नजर में इन टिकटों को पहचानना आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल था।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब जालौन निवासी प्रदीप सिंह आईपीएल मैच देखने के लिए इकाना स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम के बाहर उन्होंने दो टिकट खरीदने के लिए UPI के जरिए 1000 रुपये का भुगतान किया।जब वे मैच देखने के लिए गेट पर पहुंचे तो स्कैनिंग के दौरान टिकट फर्जी निकले। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने थाना सुशांत गोल्फ सिटी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रीकांत बोरकर, नूतन कुमार साहू, राजेन्द्र चौधरी और विश्वजीत साहू के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 फर्जी आईपीएल टिकट, 14 प्रिंटेड नकली टिकट, ASUS लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, पेपर कटर और घटना में इस्तेमाल की गई सफेद रंग की रिट्ज कार बरामद की है। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कई राज्यों में इसी तरह लोगों को ठगा हो सकता है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले दिल्ली के Arun Jaitley Stadium के बाहर नकली टिकट बेचने की कोशिश की थी। हालांकि वहां टिकट स्कैनिंग के दौरान बारकोड मैच नहीं होने से उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद गिरोह ने टिकट डिजाइन और बारकोड में कुछ बदलाव किए और फिर लखनऊ पहुंच गया। लखनऊ के Bharat Ratna Shri Atal Bihari Vajpayee Ekana Cricket Stadium के बाहर उन्होंने क्रिकेट प्रेमियों को निशाना बनाना शुरू किया।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने यह रास्ता अपनाया। गिरोह का मुख्य सदस्य विश्वजीत साहू 2D और 3D डिजाइनिंग का काम करता था। उसी ने फर्जी टिकट तैयार करने का पूरा डिजाइन सिस्टम विकसित किया। बाकी आरोपी टिकट बेचने और ग्राहकों से संपर्क करने का काम करते थे।हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अपराध पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था और इसमें तकनीकी जानकारी का भी इस्तेमाल किया गया।
Amit Kumar Anand, डीसीपी साउथ ने बताया कि पुलिस को शिकायत मिलने के बाद तत्काल जांच शुरू की गई। साइबर टीम की मदद से गिरोह का पर्दाफाश किया गया। उन्होंने कहा कि आरोपी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दे रहे थे। सोशल मीडिया से असली टिकटों की तस्वीर डाउनलोड कर उन्हें एडिट किया जाता था और नकली टिकट तैयार किए जाते थे। डीसीपी ने लोगों से अपील की कि आईपीएल या किसी भी बड़े आयोजन के टिकट केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म या आधिकारिक काउंटर से ही खरीदें। किसी अनजान व्यक्ति से टिकट खरीदने से बचें।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल तकनीक और AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब अपराधी केवल ऑनलाइन फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक की मदद से फर्जी दस्तावेज और टिकट तैयार कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस मामले ने यह भी दिखाया है कि बड़े आयोजनों के दौरान लोगों की जल्दबाजी और उत्साह का फायदा उठाकर अपराधी आसानी से ठगी को अंजाम दे सकते हैं।
फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और किन-किन राज्यों में इस रैकेट को संचालित किया गया। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले में और खुलासे हो सकते हैं। साथ ही साइबर सेल ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच भी कर रही है। फिलहाल लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने आईपीएल के नाम पर चल रहे एक हाईटेक ठगी गैंग का पर्दाफाश कर दिया।