लखनऊ के निजी संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का न्यूनतम वेतन जल्द ही तय होगा।
लखनऊ. लखनऊ के निजी संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का न्यूनतम वेतन जल्द ही तय होगा। दरअसल लखनऊ यूनिवर्सिटी निजी डिग्री कॉलेजों की फीस के साथ ही उनके शिक्षकों का न्यूनतम वेतन तय करने की भी तैयारी कर रहा है। सूत्रों से मिली जानाकरी शासन ने एलयू को सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में चलने वाले पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी न्यूनतम वेतन तय होगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने सौंपी जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग ने भी लविवि को सहयुक्त कॉलेजों की फीस तय करने का निर्देश दे रखा है। माना जा रहा है कि इस साल समाज कल्याण विभाग की स्कॉलरशिप और फीस प्रतिपूर्ति घोटाले की वजह से शासन ने यह निर्देश दिया है। एलयू का तर्क है कि जब वह कॉलेजों से फीस अपने समान लेने को कहेगा तो फिर उन्हें शिक्षकों को तय न्यूनतम वेतन भी देना चाहिए। प्रधानाचार्य परिषद ने विवि से सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की फीस तय करने के लिए पत्र लिखा है। यूनिवर्सिटी ने परिसर में चलने वाले स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की फीस इस साल 15 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की है।
बढ़ सकती है परीक्षा फीस
आने वाले समय से परीक्षा फीस भी बढ़ाई जा सकती है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने की वजह से विवि ने परीक्षा फीस भी बढ़ाने की बात कही है। अभी तक फीस तय न होने की वजह से कॉलेज भी अपनी फीस तय नहीं कर पा रहे हैं। प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष प्रो. एसडी शर्मा के अनुसार अभी तक कॉलेजों की फीस तय नहीं हो पाई है।
घपले की आई थी खबर
शासनादेश के अनुसर फीस प्रतिपूर्ति की राशि रेग्युलर पाठ्यक्रम की फीस से ज्यादा नहीं हो सकती। इसके बावजूद कॉलेज से विद्यार्थियों ने सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम की फीस भर दी। विवि ने उसी फीस के साथ ही आवेदन आगे बढ़ा दिया।विभागों ने भी विवि द्वारा भेजे गए आवेदन के आधार पर विद्यार्थियों के बैंक खातों में धनराशि भेज दी। मामला खुलने के बाद अब विवि को इसकी जिम्मेदारी दी गई है कि वह रकम की वसूली करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ विश्वविद्यालय में शुल्क भरपाई घपले की जांच के आदेश दिए हैं।