
Maulana Jarjis Ansari: उत्तर प्रदेश में इटावा के रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान देकर नया बवाल मच गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच मौलाना जर्जित अंसारी का श्रीकृष्ण को मुसलमान बताने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हजरतगंज पुलिस स्टेशन में मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ इस वायरल वीडियो को लेकर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि वीडियो में उन्होंने भगवान कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक दावा किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भगवान कृष्ण मुस्लिम थे और नमाज पढ़ते थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले के याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित वीडियो की जमकर आलोचना की है। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह बहुत निंदनीय और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें तुरंत सनातन समुदाय और हिंदू समुदाय से माफी मांगनी चाहिए। ऐसे बयान देकर वे हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं और सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं। इस्लाम लगभग 1,400 साल पहले आया था, जबकि भगवान कृष्ण 5,000 साल से भी पहले हुए थे। तो वे किस तरह की बातें कर रहे हैं? क्या उनका दिमाग खराब हो गया है?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित वीडियो पर अपनी राय रखी है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे या वेदों में नमाज का ज़िक्र है, तथ्यों के खिलाफ है। यह बिल्कुल गलत है। भगवान कृष्ण मुसलमान नहीं थे। अगर वे मुसलमान नहीं थे, तो उनके नमाज पढ़ने का सवाल ही नहीं उठता। सनातन धर्म बहुत पुराना है, जबकि इस्लाम लगभग 1,500 साल पहले आया था। अगर सनातन धर्म उससे बहुत पहले से मौजूद था, तो उस समय इस्लाम कहां था? इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद को लगभग 1,500 साल पहले 'इसरा और मेराज' के दौरान अपने अनुयायियों के लिए नमाज का तोहफा मिला था। इसलिए, ऐसे दावे करना बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना है। ऐसे बयानों से हिंदुओं और अन्य समुदायों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, और लोगों को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।