अवैध खनन व आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में प्रवर्तन निदेशालय उनसे लगातार पूछताछ कर रहा है।
लखनऊ. पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति (Gayatri Prasad Prajapati) इन दिनों ईडी (ED) के रडार पर हैं। अवैध खनन (Illegal Mining) व आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) उनसे लगातार पूछताछ कर रहा है। लेकिन वह किसी न किसी बहाने से उन सवालों को टालने की कोशिश भी कर रहे हैं। इस बीच कभी उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार किया, तो कभी अपने ही बयान से वो पलट गए। कई दफा खराब स्वास्थ्य का बहाना बनाकर वे ईडी के तीखे सवालों से बचते भी दिखे। लेकिन ईडी ने भी हार नहीं मानी और करीब छह घंटे तक की गई पूछताछ में गायत्री से कई राज भी उगलवाए।
करीब छह घंटे तक हुई पूछताछ-
उत्तर प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ का सिलसिला अगले दो दिन और जारी रहेगा। लेकिन बुधवार को हुई छह घंटे की पूछताछ में गायत्री के पसीने छूट गए। केजीएमयू में भर्ती गायत्री से सुबह 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक पूछताछ जारी रही। ईडी के सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कई बार उनकी जुबान लड़खड़ाई। उन्होंने अपने बयानों को बदला और लगातार सवालों के हमले से बचने के लिए करीब तीन बार तबीयत खराब होने का हवाला भी दिया।
स्वीकारे कुछ आरोप, फिर मुकरे-
प्रजापति ने कई सवालों पर पहले आरोप स्वीकार किए, फिर बाद में मुकर गए। कुछ सवालों पर वह चुप्पी साध गए व कुछ के बारे में जानकारी न होने की बात भी कही। इस बीच तबीयत बिगड़ने की बात पर चिकित्सकों को भी बुलाया गया और पूछताछ जारी की गई। लेकिन गायत्री फिर भी कई पैंतरे बदलते रहे। कुछ सवालों को वे बेबुनियाद बताने की कोशिश करते रहे तो कुछ पर कहा कि उन पर गलत आरोप लगाया जा रहा है।
पूछे गए यह सवाल-
ईडी की टीम ने अपनी इनटेरोगेशन में मुख्यतः उनकी संपत्ति से जुड़े सवाल पूछे। उनसे जवाब मांगा गया कि आखिर मंत्री रहते उनके पास आय से अधिक संपत्ति कैसे आई। संपत्ति में कितनी पैतृक है और कितनी उन्होंने अर्जित की है। इसी के साथ उनसे उन कंपनियों के बारे में भी जानकारी मांगी गई, जिनमें उनकी ऊपरी कमाई होने की बात सामने आ रही है। इस बीच ईडी ने उनकी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज दिखाए तो वे चुप्पी साध गए। ईडी ने गायत्री से उनके उन करीबियों व रिश्तेदारों की संपत्तियों के बारे में पूछताछ की जो गायत्री की बताई जा रही हैं। मंत्री रहते नियमों को दरकिनार कर किए गए पट्टों के कुछ आवंटन को लेकर भी उनसे सवाल किए गए।