लखनऊ

Gift Deed Rule: ₹5000 स्टांप पर गिफ्ट डीड रजिस्ट्री, योगी सरकार ने औद्योगिक संपत्तियों पर लगाई पांच साल की शर्त

Gift Deed on ₹5000 Stamp: उत्तर प्रदेश सरकार ने गिफ्ट डीड रजिस्ट्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब परिजनों के बीच औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां मात्र 5000 रुपये के स्टांप पर दान की जा सकेंगी, लेकिन ऐसी संपत्तियां पांच वर्षों तक किसी अन्य के नाम स्थानांतरित नहीं की जा सकेंगी।

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Jan 11, 2026
₹5000 के स्टांप पर गिफ्ट डीड: पांच साल तक संपत्ति आगे दान नहीं कर सकेंगे, योगी सरकार ने लगाई शर्त (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Gift Deed Rule Update: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने परिजनों के बीच औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों के हस्तांतरण को आसान बनाते हुए गिफ्ट डीड रजिस्ट्री की सुविधा को विस्तार दिया है। हालांकि, इस सुविधा के साथ एक अहम शर्त भी जोड़ दी गई है। अब ₹5000 के स्टांप पर गिफ्ट डीड के जरिए रजिस्ट्री कराई गई संपत्ति को अगले पांच वर्षों तक किसी अन्य व्यक्ति के नाम दान नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह शर्त इस योजना के दुरुपयोग को रोकने और पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

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नई अधिसूचना जारी, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने तय किए नियम

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव अमित गुप्ता ने शुक्रवार को गिफ्ट डीड रजिस्ट्री से संबंधित नई अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के तहत स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई संपत्ति गिफ्ट डीड के माध्यम से रजिस्टर्ड की जाती है, तो उसे पांच साल तक किसी अन्य व्यक्ति को दान नहीं किया जा सकेगा। विभागीय मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि सरकार का यह निर्णय पारिवारिक संबंधों के भीतर संपत्ति हस्तांतरण को सरल और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

किन रिश्तों के बीच लागू होगी यह सुविधा

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ₹5000 के स्टांप शुल्क और एक प्रतिशत पंजीकरण शुल्क पर गिफ्ट डीड रजिस्ट्री की सुविधा केवल निकट पारिवारिक संबंधियों के लिए ही लागू होगी। इसमें निम्नलिखित रिश्ते शामिल हैं-

  • पुत्र
  • पुत्री
  • पिता
  • माता
  • पति
  • पत्नी
  • पुत्रवधू
  • सगा भाई

सगे भाई की पत्नी (भाई के निधन की स्थिति में)

  • सगी बहन
  • दामाद
  • पौत्र और पौत्री

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्री केवल पात्र व्यक्ति के नाम पर ही की जा सकेगी और किसी तीसरे व्यक्ति के नाम यह सुविधा लागू नहीं होगी।

कंपनी, ट्रस्ट और संस्थाओं पर नहीं होगा लागू

मंत्री रवींद्र जायसवाल ने यह भी साफ किया कि यह प्रावधान किसी भी वैधानिक या विधिक इकाई पर लागू नहीं होगा। यानी-

  • फर्म
  • कंपनी
  • ट्रस्ट
  • संस्था

इनमें से कोई भी इकाई न तो दानकर्ता बन सकती है और न ही दान प्राप्तकर्ता। इसके अलावा, यदि किसी संपत्ति का स्वामित्व किसी कंपनी, ट्रस्ट या संस्था के नाम है, तो उस संपत्ति पर भी यह सुविधा लागू नहीं होगी।

अब औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल

इससे पहले यह सुविधा केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों तक सीमित थी। लेकिन योगी सरकार ने अब इसे औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों तक भी विस्तारित कर दिया है। इसका लाभ उन व्यापारिक परिवारों को मिलेगा, जहां पीढ़ी दर पीढ़ी कारोबार से जुड़ी संपत्तियों का हस्तांतरण किया जाता है। सरकार का मानना है कि इससे उद्योग और व्यापार से जुड़े परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें भारी स्टांप शुल्क से बचाया जा सकेगा।

₹5000 स्टांप शुल्क और 1% पंजीकरण शुल्क

नई व्यवस्था के तहत गिफ्ट डीड रजिस्ट्री के लिए ₹5000 का निश्चित स्टांप शुल्क, संपत्ति के मूल्य पर 1 प्रतिशत पंजीकरण शुल्क देना होगा। पहले औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों की रजिस्ट्री में भारी शुल्क देना पड़ता था, जिससे लोग अक्सर अनौपचारिक तरीकों का सहारा लेते थे। सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से वैध रजिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।

पांच साल की शर्त क्यों जरूरी

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में देखा गया था कि कम स्टांप शुल्क का लाभ उठाकर संपत्तियों को बार-बार गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर किया जा रहा था। इससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि कानून का दुरुपयोग भी हो रहा था। इसी को रोकने के लिए यह शर्त जोड़ी गई है कि गिफ्ट डीड से रजिस्टर्ड संपत्ति को पांच साल तक किसी अन्य व्यक्ति के नाम दान नहीं किया जा सकेगा।

सरल, पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था

योगी सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ,परिजनों के बीच संपत्ति हस्तांतरण को आसान बनाना, स्टांप ड्यूटी की चोरी रोकना, रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, विवादों को कम करना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवादों में भी कमी आएगी।

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