रबी फसलों की खरीद को लेकर सरकार ने नई रणनीति बनाई है। चना, मसूर और सरसों की MSP पर बड़े पैमाने पर खरीद होगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।
Agriculture Rural Economy: रबी सीजन की फसलों की खरीद को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार से मिली अतिरिक्त छूट के बाद अब राज्य में गेहूं, दलहन और तिलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बड़े पैमाने पर की जाएगी। इस कदम से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि भारत सरकार ने राज्य को एमएसपी पर खरीद के लिए अतिरिक्त अनुमति प्रदान की है, जिससे खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। राज्य सरकार खुद गेहूं की खरीद सुनिश्चित करेगी, जबकि दलहन और तिलहन की खरीद के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों की खरीद के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं। मसूर की 6 लाख 77 हजार मीट्रिक टन, चने की 2 लाख 24 हजार मीट्रिक टन और सरसों की 5 लाख 30 हजार मीट्रिक टन खरीद की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रदेशभर में खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार ने इस वर्ष एमएसपी में भी वृद्धि की है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। चने का एमएसपी 5875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। मसूर का एमएसपी 7000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें 300 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जो पिछले वर्ष से 250 रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत लेकर आई है और इससे उनकी आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम उचित मूल्य मिले और बाजार में कीमतें गिरने पर भी उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। एमएसपी व्यवस्था से किसानों को आर्थिक स्थिरता मिलती है और वे अपनी खेती में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं।
फसलों की खरीद के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत सरकार की ओर से नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार की ओर से पीसीएफ (PCF) और यूपीएसएस (UPSS) सहित कुल चार एजेंसियां खरीद प्रक्रिया में शामिल होंगी। ये एजेंसियां किसानों से सीधे फसल खरीदेंगी और उसे केंद्र सरकार की एजेंसियों को उपलब्ध कराएंगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खरीदी गई फसलों का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भुगतान होने से किसानों को समय पर उनका पैसा मिल सकेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।
राज्य सरकार ने खरीद केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए भी व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। प्रत्येक जिले में पर्याप्त संख्या में केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर न जाना पड़े। इसके अलावा, खरीद केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जैसे तौल मशीन, भंडारण की व्यवस्था और कर्मचारियों की तैनाती।
सरकार किसानों को एमएसपी और खरीद प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने के लिए भी अभियान चला रही है। किसानों को बताया जा रहा है कि वे अपनी उपज केवल अधिकृत केंद्रों पर ही बेचें और किसी भी प्रकार के बिचौलियों से बचें। इसके साथ ही, किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खरीद प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जा सके।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि वर्तमान सरकार ने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और खरीद व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। अधिकारियों का दावा है कि अब किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है और खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं होने दी जा रही है।