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Lawyers Strike: सिविल कोर्ट लाठीचार्ज पर भड़के वकील, लखनऊ में तीन दिन की हड़ताल शुरू हुई

Lucknow Lawyers Strike: लखनऊ सिविल कोर्ट में वकीलों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं ने तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 18, 2026

18 से 20 मई तक न्यायिक कार्य बहिष्कार, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग तेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

18 से 20 मई तक न्यायिक कार्य बहिष्कार, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग तेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Lawyers Protest: लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के बाद वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया है। सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ ने इस घटना के विरोध में 18 मई से 20 मई 2026 तक पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार (हड़ताल) की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद राजधानी की न्यायिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

रविवार को आयोजित सेंट्रल बार एसोसिएशन की आकस्मिक आम सभा में अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई को “बर्बरतापूर्ण” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। सभा में बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे और एक स्वर में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई। बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने की, जबकि संचालन महासचिव अवनीश दीक्षित ने किया। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

जानिए क्या था मामला 

लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर में हाल ही में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ कोर्ट परिसर में अवैध चैंबरों को हटाने पहुंची थी। नगर निगम द्वारा पहले ही अवैध निर्माणों पर नोटिस जारी कर लाल निशान लगाए गए थे। लेकिन जब बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, तो अधिवक्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

वकीलों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उनके चैंबर तोड़े जाने लगे। विरोध के दौरान कई अधिवक्ता बुलडोजर के सामने बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा अधिवक्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में कई अधिवक्ताओं के घायल होने की बात सामने आई है। घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

सेंट्रल बार एसोसिएशन द्वारा पारित प्रस्ताव में थाना ठाकुरगंज प्रभारी ओमवीर सिंह, एक अज्ञात दरोगा और 20 से 25 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया और अधिवक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

बार एसोसिएशन ने कहा कि यह केवल वकीलों पर हमला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा पर भी हमला है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि पुलिस इस तरह न्यायालय परिसर में बल प्रयोग करेगी, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

तीन दिन तक ठप रहेगा न्यायिक कार्य

बार एसोसिएशन ने 18 मई से 20 मई तक पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। इस दौरान अधिवक्ता अदालतों में कोई न्यायिक कार्य नहीं करेंगे। इस फैसले का असर हजारों मुकदमों की सुनवाई पर पड़ सकता है। बड़ी संख्या में वादकारी और आम लोग अदालतों में अपने मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचते हैं। हड़ताल के चलते कई मामलों की तारीख आगे बढ़ सकती है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है और जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

घायल वकीलों को आर्थिक सहायता

लाठीचार्ज में घायल हुए अधिवक्ताओं के इलाज के लिए सेंट्रल बार एसोसिएशन ने आर्थिक सहायता देने का निर्णय भी लिया है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार कई घायल अधिवक्ता अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। एसोसिएशन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर और अधिक आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा। इस फैसले को अधिवक्ताओं के बीच एकजुटता और समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

20 मई को फिर होगी बड़ी बैठक

सेंट्रल बार एसोसिएशन ने 20 मई 2026 को दोपहर 2 बजे फिर से एक बड़ी आम सभा बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही लखनऊ जनपद के सभी बार एसोसिएशन पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि यदि प्रशासन ने अधिवक्ताओं की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

हाईकोर्ट में रखा जाएगा वकीलों का पक्ष

आम सभा में यह भी फैसला लिया गया कि अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महासचिव अवनीश दीक्षित को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में लंबित याचिका में अधिवक्ताओं का पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया जाए। दोनों पदाधिकारी अदालत में वकालतनामा दाखिल कर अधिवक्ताओं की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि न्यायालय परिसर में हुई घटना का पूरा पक्ष अदालत के सामने रखा जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

प्रशासन और पुलिस पर बढ़ा दबाव

घटना के बाद प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ गया है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया। वहीं प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही थी। अधिकारियों का दावा है कि अवैध निर्माणों को लेकर पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। हालांकि, पुलिस लाठीचार्ज को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सोशल मीडिया पर भी छाया मामला

लखनऊ सिविल कोर्ट की घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें लगातार शेयर की जा रही हैं। कई लोग पुलिस कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग कोर्ट परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।

न्याय व्यवस्था पर असर की आशंका

तीन दिन की हड़ताल के चलते न्यायिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से दूर रहने के कारण अदालतों में सुनवाई प्रभावित हो सकती है।कई वादकारियों ने चिंता जताई है कि पहले से लंबित मामलों में और देरी हो सकती है। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि वकीलों की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल उठेंगे, तो इसका असर न्यायिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

बार एसोसिएशन ने भेजी प्रस्ताव की प्रतियां

जानकारी के अनुसार आम सभा में पारित प्रस्ताव की प्रतियां जनपद न्यायाधीश, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई हैं। बार एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।