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यूपी के 24 हजार अनुदेशकों को बड़ी सौगात: अब मिलेगी 17 हजार सैलरी, महिला कर्मचारियों को 6 महीने मैटरनिटी लीव

UP News: उत्तर प्रदेश में अनुदेशकों के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 हजार से अधिक अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का लाभ देते हुए उनकी सैलरी 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपए कर दी है।

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लखनऊ

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Mohd Danish

May 17, 2026

up instructors salary maternity leave updates

यूपी के 24 हजार अनुदेशकों को बड़ी सौगात | Image - X/@myogiadityanath

UP Instructor Salary Hike:उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है। रविवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 हजार 717 अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का चेक वितरित किया। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से उनका मानदेय 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 17 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया है। इस फैसले से प्रदेशभर के हजारों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

शिक्षा व्यवस्था की नींव बताए गए अनुदेशक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की असली ताकत उसके शिक्षक और अनुदेशक होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत भवन की तरह शिक्षा की नींव भी मजबूत होनी चाहिए, भले ही वह दिखाई न दे। बेसिक शिक्षक, शिक्षामित्र और अंशकालिक अनुदेशक शिक्षा विभाग की रीढ़ हैं और इसलिए उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

2011-12 में हुई थी बड़ी भर्ती प्रक्रिया

प्रदेश में वर्ष 2011-12 के दौरान कुल 41 हजार 307 अनुदेशकों की भर्ती की गई थी। इन्हें 13 हजार 769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के शैक्षणिक विकास और कौशल प्रशिक्षण के लिए नियुक्त किया गया था। उस समय अनुदेशकों को हर महीने केवल 7 हजार रुपए मानदेय दिया जाता था। वर्तमान में करीब 24 हजार 296 अनुदेशक सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।

2022 के बाद दूसरी बार बढ़ाया गया मानदेय

सरकार ने इससे पहले वर्ष 2022 में अनुदेशकों के मानदेय में 2 हजार रुपए की वृद्धि की थी। अब एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए मानदेय को सीधे 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपए कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने अनुदेशकों को 5 लाख रुपए तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने का भी निर्णय लिया है। यह योजना स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में बड़ी राहत साबित होगी।

महिला अनुदेशकों को मिलेगा 6 महीने मातृत्व अवकाश

प्रदेश सरकार ने महिला अनुदेशकों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। अब महिला अनुदेशकों को 6 महीने का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी। सरकार के इस कदम को महिला कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे महिला अनुदेशकों को नौकरी और परिवार दोनों जिम्मेदारियों को संतुलित करने में सहायता मिलेगी।

यूपी में तेजी से घटा स्कूल ड्रॉपआउट रेट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले प्रदेश के स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट 17 से 18 प्रतिशत तक था, यानी हर 100 बच्चों में से करीब 18 बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ देते थे। लेकिन अब यह घटकर लगभग 3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में बेसिक शिक्षकों तथा अनुदेशकों की नई भर्ती भी की जाएगी।

बच्चों को डांट नहीं, सही दिशा देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है और शिक्षकों का दायित्व है कि वे उसे सही दिशा दें। बच्चों को अपमानित करने या मारने के बजाय उन्हें प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे स्कूल की साफ-सफाई में सहयोग करते हैं तो उन्हें दंडित नहीं बल्कि सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों के वीडियो वायरल करना समाज के लिए गलत संदेश देता है।

वैश्विक संकट पर भी बोले मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक हालातों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। यहां तक कि अमेरिका जैसे संपन्न देशों में भी महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समय पर फैसले लिए गए, जिसकी वजह से देश आर्थिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर पा रहा है।

2017 से चल रहा था मानदेय विवाद

अनुदेशकों के मानदेय को लेकर विवाद कई वर्षों से चल रहा था। वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने मानदेय को करीब 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 17 हजार रुपए करने का फैसला लिया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह निर्णय लागू नहीं हो सका। इसके विरोध में अनुदेशकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। बाद में राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद डबल बेंच ने एक वर्ष के लिए 17 हजार रुपए भुगतान का निर्देश दिया। मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 5 फरवरी को राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी सुरक्षा पर दिया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकतीं। अदालत ने कहा कि लगातार 10 वर्षों से कार्य करने के कारण ये पद स्वतः सृजित माने जाएंगे। कोर्ट ने 2017 से 17 हजार रुपए मानदेय लागू करने का निर्देश दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 फरवरी को विधानसभा में बढ़े हुए मानदेय को लागू करने का ऐलान किया था।