
ब्लड बैंक घोटाला, बिना टेस्ट खून सप्लाई का खुलासा (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Lucknow-Kanpur blood scam : राजधानी लखनऊ और कानपुर में ब्लड बैंकों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की छापेमारी में खून के कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पकड़ी गई हैं। जांच के दौरान 11 ब्लड बैंकों में गड़बड़ी मिलने पर सभी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मुद्दा सामने आया है। आरोप है कि कई ब्लड बैंकों में बिना अनिवार्य एलिसा (ELISA) टेस्ट के ही खून निकाला और वितरित किया जा रहा था, जो बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, किसी भी रक्त को मरीज को चढ़ाने से पहले एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच के लिए एलिसा टेस्ट अनिवार्य होता है। लेकिन एफएसडीए की टीम को जांच में पता चला कि कई ब्लड बैंक इस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे थे। बताया गया कि इन केंद्रों पर महंगे और सटीक एलिसा टेस्ट की जगह साधारण डायग्नोस्टिक किट से जांच की जा रही थी, जो विश्वसनीय नहीं मानी जाती। इससे संक्रमित खून मरीजों तक पहुंचने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
एफएसडीए की टीम ने लखनऊ और कानपुर के कई ब्लड बैंकों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान दस्तावेजों की जांच, उपकरणों का निरीक्षण और रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया। जांच में सामने आया कि 11 ब्लड बैंकों में गंभीर अनियमितताएं हैं। कहीं रिकॉर्ड अधूरा था तो कहीं पूरी तरह गायब। कई जगहों पर ब्लड डोनर्स का कोई स्पष्ट विवरण नहीं मिला, जिससे यह संदेह गहरा गया कि खून की खरीद-फरोख्त अवैध तरीके से की जा रही थी।
नियमों के अनुसार, हर ब्लड डोनर का पूरा विवरण सुरक्षित रखना जरूरी होता है, जिसमें उसका नाम, पता, स्वास्थ्य स्थिति और रक्तदान की तारीख शामिल होती है। लेकिन जांच के दौरान पाया गया कि कई ब्लड बैंकों में यह रिकॉर्ड या तो अधूरा था या बिल्कुल मौजूद नहीं था।
इससे यह आशंका जताई जा रही है कि इन ब्लड बैंकों में पेशेवर डोनर्स से खून खरीदा जा रहा था, जो स्वास्थ्य मानकों के खिलाफ है। ऐसे डोनर्स अक्सर बार-बार खून देते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है और खून की गुणवत्ता भी संदिग्ध हो जाती है।
एफएसडीए अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि संगठित अवैध कारोबार का भी हो सकता है। बिना रिकॉर्ड के खून का लेन-देन और सस्ते परीक्षण का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि कुछ लोग मुनाफे के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि इन ब्लड बैंकों में खून की खरीद-फरोख्त अवैध तरीके से जारी थी। यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।
जिन 11 ब्लड बैंकों में गड़बड़ी पाई गई, उन सभी पर तत्काल प्रभाव से संचालन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, उनके लाइसेंस की जांच शुरू कर दी गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि जब तक ये ब्लड बैंक सभी मानकों का पालन नहीं करेंगे और पूरी तरह से संतोषजनक जवाब नहीं देंगे, तब तक इन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। अधिकारियों ने कहा है कि ब्लड बैंकों की नियमित जांच और सख्त निगरानी की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें। साथ ही, अस्पतालों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे केवल प्रमाणित और विश्वसनीय ब्लड बैंकों से ही रक्त लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना उचित जांच के खून चढ़ाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे मरीजों में गंभीर संक्रमण फैल सकता है, जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है। डॉक्टरों के अनुसार, एलिसा टेस्ट जैसे मानकों का पालन न करना सीधे तौर पर चिकित्सा लापरवाही की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत और प्रमाणित ब्लड बैंकों से ही रक्त लें। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। इसके अलावा, रक्तदान करने वाले लोगों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे केवल वैध और पंजीकृत केंद्रों पर ही रक्तदान करें।
Published on:
31 Mar 2026 12:16 pm
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