
Historic Passing Out Parade in Lucknow: उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब राजधानी लखनऊ में आयोजित भव्य दीक्षांत परेड समारोह में 60,244 आरक्षी नागरिक पुलिस (सीधी भर्ती 2025 बैच) ने शपथ लेकर सेवा में प्रवेश किया। यह आयोजन न केवल राज्य बल्कि देश के स्तर पर भी पहली बार इतनी बड़ी संख्या में एक साथ आयोजित किया गया, जिसने पुलिस प्रशिक्षण और क्षमता का नया मानक स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर परेड की सलामी ली और खुली जिप्सी में सवार होकर जवानों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षियों को सम्मानित भी किया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों से आए जवानों की अनुशासन, समर्पण और दक्षता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदेशभर में एक साथ 112 रिक्रूट ट्रेनिंग केंद्रों, जिनमें 10 पुलिस प्रशिक्षण संस्थान, 73 जनपदों की पुलिस लाइंस और 29 पीएसी बटालियन शामिल हैं। यह दीक्षांत परेड आयोजित की गई। यह आयोजन अपने आप में अभूतपूर्व रहा, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस की संगठनात्मक क्षमता और समन्वय को प्रदर्शित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि 15 जून 2025 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा इन 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। इसके बाद 21 जुलाई 2025 से इनका प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ, जो अब सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है।
सीएम योगी ने कहा कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने पाया कि सुविधाओं और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आधुनिक तकनीकों, उन्नत हथियारों और अनुशासन आधारित प्रशिक्षण ने जवानों को पूरी तरह तैयार किया है। उन्होंने कहा, “आज की यह ड्रिल इस बात की गवाह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने खुद को समय के अनुसार ढालते हुए एक सक्षम और आधुनिक बल के रूप में विकसित किया है।”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस स्वयं संकटों और चुनौतियों से जूझ रही थी। प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू, माफिया का दबदबा, गुंडा टैक्स और अवैध वसूली आम बात थी। लेकिन पिछले वर्षों में सरकार की स्पष्ट नीति और सख्त कानून-व्यवस्था के चलते स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा, “अब प्रदेश में दंगे नहीं होते, अपराधियों में कानून का भय है और पुलिस का मनोबल ऊंचा हुआ है।”
सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 2,18,000 से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गई है, जबकि एक लाख से अधिक कर्मियों को विभिन्न चरणों में पदोन्नति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता मात्र 3,000 थी, लेकिन आज इसे बढ़ाकर 60,000 से अधिक कर दिया गया है। यह परिवर्तन पुलिस बल को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस भर्ती प्रक्रिया की एक खास बात यह रही कि इसमें 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती भागीदारी से न केवल बल की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में बेटियां और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपराधियों के प्रति सख्त रवैया और कानून का निष्पक्ष पालन ही आज प्रदेश की पहचान बन चुका है। उन्होंने नवप्रशिक्षित आरक्षियों से आह्वान किया कि वे अपराधियों के प्रति कठोर और आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील रहें। यही एक आदर्श पुलिसकर्मी की पहचान है।
सीएम योगी ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, कौशल और मूल्यों का उपयोग पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ करें। उन्होंने विश्वास जताया कि ये सभी आरक्षी यूपी पुलिस की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी नवप्रशिक्षित जवानों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का अवसर है, जिसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना चाहिए।