26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक साथ नजर आए बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह; सपा, कांग्रेस की बढ़ाएंगे टेंशन! पूर्वांचल के नए सियासी तूफान की सुगबुगाहट?

Brijbhushan Singh And Dhananjay Singh News: पूर्वांचल में सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। बृजभूषण सिंह और धनंजय सिंह हाल ही में एक साथ नजर आए।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Harshul Mehra

Apr 26, 2026

brijbhushan sharan singh and dhananjay singh seen together may increase tension for SP and Congress up politics

पूर्वांचल में सियासी हलचल तेज, बृजभूषण-धनंजय की नजदीकी से नए समीकरणों की चर्चा, फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

Brijbhushan Singh And Dhananjay Singh News: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन पूर्वांचल में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की बढ़ती नजदीकियों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दोनों नेताओं का एक साथ दिखना संभावित नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा माना जा रहा है।

रितेश्वर महाराज के दरबार में साथ दिखे दोनों नेता

हाल ही में रितेश्वर महाराज के सोशल मीडिया हैंडल से कुछ तस्वीरें और एक वीडियो सामने आए, जिनमें बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने गुरुदेव से आशीर्वाद लिया और इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इस मुलाकात को सिर्फ धार्मिक या आध्यात्मिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। खास बात यह है कि दोनों नेता पहले भी बिहार में एक मंच साझा कर चुके हैं, जिससे इस मुलाकात को और ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

पूर्वांचल में दोनों नेताओं का मजबूत प्रभाव

पूर्वांचल की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह दोनों का अलग-अलग प्रभाव माना जाता है। बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय से बीजेपी के मजबूत और मुखर चेहरों में गिने जाते हैं। कई जिलों में उनका प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ मजबूत मानी जाती है। धनंजय सिंह भी पूर्वांचल की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका रखते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बीजेपी को समर्थन देकर अपने राजनीतिक रुख को लेकर भी संदेश दिया था।

क्या बन रहा है नया राजनीतिक गठजोड़?

दोनों नेताओं की बढ़ती नजदीकियों को लेकर अटकलें तेज हैं कि 2027 के चुनाव से पहले कोई नया राजनीतिक तालमेल आकार ले सकता है। माना जा रहा है कि अगर दोनों नेता संयुक्त रणनीति के तहत सक्रिय होते हैं तो पूर्वांचल की कई सीटों पर चुनावी असर देखने को मिल सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समीकरण सिर्फ व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय राजनीति और चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ सकता है प्रभाव

इस मुलाकात को बीजेपी के भीतर भी शक्ति संतुलन के नजरिये से देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बृजभूषण और धनंजय का तालमेल पार्टी के भीतर उनके कद को और मजबूत कर सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उनकी संयुक्त सक्रियता नए राजनीतिक संदेश भी दे सकती है।

2027 की बिसात पर शुरुआती चालें

प्रदेश की सभी प्रमुख पार्टियां 2027 के लिए जमीन तैयार करने में जुटी हैं। ऐसे में इस तरह की मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रहीं, बल्कि इन्हें आने वाले चुनावी समीकरणों की शुरुआती चाल के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्वांचल की राजनीति में यह नई नजदीकी किस रूप में सामने आती है, इस पर अब राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं।

विरोधियों के लिए बढ़ सकती है चुनौती

अगर यह तालमेल आगे राजनीतिक रूप लेता है तो अन्य दलों (सपा, कांग्रेस, बसपा) के लिए चुनौती बढ़ सकती है। पूर्वांचल में जातीय और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से यह समीकरण चुनावी गणित बदलने की क्षमता रखता है।

आध्यात्मिक मुलाकात या राजनीतिक पावर गेम?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ आशीर्वाद लेने की मुलाकात थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। फिलहाल इस मुलाकात ने पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है, और आने वाले समय में यह ‘पावर गेम’ किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।