
IAS Divya Mittal Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सफल सेवा के बाद स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। दिव्या मित्तल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भावनात्मक पोस्ट शेयर कर कहा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है। मिर्जापुर में डीएम रहते हुए लहुरियादह गांव में आजादी के 75 साल बाद पेयजल पहुंचाने वाले उनके काम की सराहना हुई थी। अब उनके इस फैसले की चर्चा यूपी से बिहार तक हो रही है।
दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से शिक्षा हासिल की। लंदन में सफल करियर छोड़कर वे देश सेवा के लिए आईएएस बनीं। मिर्जापुर, संत कबीरनगर और देवरिया की डीएम रहने के बाद राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाई गईं। करीबियों के अनुसार फील्ड पोस्टिंग छूटने से वे संतुष्ट नहीं थीं। परिवार और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर उन्होंने यह कदम उठाया।
बिहार कैडर के आधा दर्जन से अधिक IAS-IPS अधिकारियों ने बीच में ही सेवा छोड़ दी। निजी-पारिवारिक कारण, स्वास्थ्य समस्या, राजनीति में रुचि या निजी सेक्टर में बेहतर अवसर जैसे कारण बताए जाते हैं। ज्यादातर ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा सौंपा।
बिहार कैडर की 2019 बैच की आईपीएस काम्या मिश्रा ‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर रहीं। दरभंगा ग्रामीण एसपी रहते हुए अगस्त 2024 में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया। छह साल के छोटे कार्यकाल में उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से पहचान बनाई। बाद में उन्होंने बताया कि पावर को कसकर पकड़ना थकाने वाला होता है, बदलाव के लिए छोड़ना हार नहीं।
आईपीएस डॉ. अजय कुमार ने अपराधियों के खिलाफ सख्ती से ख्याति पाई, फिर मन ऊबने पर इस्तीफा दे दिया। ‘सिंघम’ शिवदीप लांडे ने 18 साल बाद सेवा छोड़ी। आईएएस अश्विनी ठाकरे ने विदेश बसने का फैसला लिया। डॉ. गौतम गोस्वामी स्वास्थ्य कारणों से और आर लक्ष्मणन निजी सेक्टर चुनकर बाहर निकले।
विशेषज्ञों के अनुसार काम का बढ़ता दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप, परिवार की जिम्मेदारियां और नए क्षेत्रों में रुचि प्रमुख कारण हैं। कई अधिकारी 10-15 साल बाद निजी संतुष्टि या सामाजिक कार्यों की ओर रुख करते हैं। दिव्या मित्तल से काम्या मिश्रा तक ये इस्तीफे प्रशासनिक सेवा में मोहभंग की ओर इशारा करते हैं।