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Divya Mittal IAS Resignation: दिव्या मित्तल का 8 जिलों का सफर लेकिन इस्तीफे में सिर्फ देवरिया-मिर्जापुर का जिक्र; जानिए क्यों?

Divya Mittal IAS Resignation: IAS दिव्या मित्तल ने करीब 11 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया है। अपने विदाई संदेश में उन्होंने कई पोस्टिंग के बीच मिर्जापुर और देवरिया को खास तौर पर याद किया। जानिए इन दोनों जिलों से जुड़ी कौन-सी यादें उनके लिए सबसे खास रहीं।
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लखनऊ

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Harshul Mehra

Aug 31, 2026

ias divya mittal resignation service history mirzapur deoria

दिव्या मित्तल। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Divya Mittal IAS Resignation: उत्तर प्रदेशकैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद उनकी प्रशासनिक यात्रा एक बार फिर चर्चा में है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जिलों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इस्तीफे के साथ साझा किए गए अपने भावुक संदेश में उन्होंने खास तौर पर मिर्जापुर और देवरिया का जिक्र किया। दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर को लेकर लिखा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बल्कि एक राय है। वहीं देवरिया के लिए उन्होंने कहा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे के बाद इन दोनों जिलों से जुड़ी उनकी यादें और अनुभव लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

मेरठ से शुरू हुआ था प्रशासनिक सफर

दिव्या मित्तल की प्रशासनिक सेवा की शुरुआत मेरठ से हुई थी। उन्हें यहां संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती मिली थी। उन्होंने 27 नवंबर 2015 को मेरठ में कार्यभार संभाला और करीब डेढ़ साल तक इस जिम्मेदारी में रहीं। 2 मई 2017 तक उन्होंने मेरठ में काम किया। इसके अगले ही दिन यानी 3 मई 2017 को उन्हें गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की जिम्मेदारी दी गई। गोंडा में उनका कार्यकाल करीब एक साल रहा। इसके बाद उनकी पोस्टिंग जिला प्रशासन से बाहर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में भी हुई।

गोंडा के बाद कानपुर और बरेली में संभाली अहम जिम्मेदारियां

17 अप्रैल 2018 को दिव्या मित्तल को कानपुर नगर में यूपीएसआईडीसी से जुड़ी जिम्मेदारी मिली। यहां उन्होंने संयुक्त महाप्रबंधक के तौर पर काम किया। इससे साफ हुआ कि उनके प्रशासनिक करियर में केवल जिला स्तर की पोस्टिंग ही नहीं, बल्कि विकास और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल रहीं। कानपुर के बाद 15 फरवरी 2019 को उन्हें बरेली विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया। करीब डेढ़ साल बाद उनकी फिर जिला प्रशासन में वापसी हुई।

संत कबीर नगर की DM बनीं, यहीं से जिला प्रशासन में पहचान मजबूत हुई

11 सितंबर 2020 को दिव्या मित्तल ने संत कबीर नगर के जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। यह उनके प्रशासनिक करियर का अहम पड़ाव माना जाता है। DM के रूप में काम करने के दौरान जिला स्तर पर प्रशासन की कमान संभालने वाली अधिकारी के तौर पर उनकी पहचान और मजबूत हुई। करीब 2 साल बाद 17 सितंबर 2022 को उनका तबादला मिर्जापुर कर दिया गया। यही वह जिला रहा, जिसका जिक्र उन्होंने बाद में अपने इस्तीफे के संदेश में बेहद भावुक अंदाज में किया।

मिर्जापुर ने सिखाया- 'असंभव' सिर्फ एक राय है

दिव्या मित्तलकरीब एक साल तक मिर्जापुर की DM रहीं। उन्होंने 17 सितंबर 2022 से 1 सितंबर 2023 तक जिले की जिम्मेदारी संभाली। इस्तीफे के संदेश में मिर्जापुर को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। उन्होंने मां विंध्यवासिनी का भी जिक्र किया। दिव्या मित्तल के मुताबिक, मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर उन्होंने महसूस किया कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और लोगों के विश्वास से आती है।

लहुरियादह की बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद नहीं भूलीं

मिर्जापुर से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए दिव्या मित्तल ने लहुरियादह की पहाड़ी की एक बुजुर्ग महिला की याद साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में पहली बार पानी पहुंचने के बाद वह बुजुर्ग महिला कुछ नहीं बोलीं। उन्होंने सिर्फ कांपते हाथों से दिव्या मित्तल के सिर को छूकर उन्हें आशीर्वाद दिया। दिव्या मित्तल के लिए वह पल किसी सरकारी पद या उपलब्धि से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पद भले ही पीछे छूट गया, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का वह स्पर्श उनकी जिंदगी भर की याद बन गया।

मिर्जापुर के बाद लखनऊ और फिर देवरिया की जिम्मेदारी

मिर्जापुर से तबादले के बाद 4 सितंबर 2023 को दिव्या मित्तल को प्रतीक्षारत किया गया। इसके बाद 1 फरवरी 2024 को उन्हें लखनऊ में सीईओ, यूपीआरआरडीए की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद उनकी फिर जिला प्रशासन में वापसी हुई। 13 जुलाई 2024 को उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया।

देवरिया में उन्होंने करीब पौने 2 साल तक जिलाधिकारी के तौर पर काम किया। इसके बाद 6 मई 2026 को उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई और लखनऊ भेज दिया गया। यही उनकी आखिरी दर्ज प्रशासनिक तैनाती रही।

देवरिया को लेकर भी क्यों भावुक हुईं दिव्या मित्तल?

इस्तीफे के संदेश में दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के साथ देवरिया को भी विशेष रूप से याद किया। उन्होंने लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। उनके संदेश में यह बात बार-बार दिखाई देती है कि प्रशासनिक सेवा उनके लिए सिर्फ पद और जिम्मेदारी तक सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने काम को आम लोगों की जिंदगी में बदलाव से जोड़कर देखा। उन्होंने लिखा कि उनके लिए अपने जीवन के कई सपने पूरे हो चुके थे, लेकिन अब उन सपनों को जीने की इच्छा थी, जो उन्होंने अपने लोगों के लिए देखे थे।

जमीन का हक, किसान के खेत तक पानी… इन्हीं पलों को बताया असली सुकून

दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में प्रशासनिक सेवा के दौरान मिले अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा संतोष उन लोगों की आंखों में दिखाई दिया, जिनके परिवार को पहली बार जमीन का हक मिला। उन्होंने उस दिव्यांग व्यक्ति का भी जिक्र किया, जिसे सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला और उस किसान की बात की, जिसके खेत तक पानी पहुंचा। यानी उनके लिए प्रशासनिक सेवा की सफलता केवल सरकारी पद या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए बदलाव से जुड़ी रही।

दिव्या मित्तल ने इस्तीफे की वजह पर तोड़ी चुप्पी

इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी दबाव या अचानक पैदा हुई परिस्थिति का नतीजा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद लिया है। उनके मुताबिक, IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक अध्याय है, पूरी जिंदगी नहीं। दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं, रुचियों और परिवार को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने भविष्य की योजनाओं को लेकर संकेत दिया कि वह लेखन, शिक्षण और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में आगे काम कर सकती हैं।

दो बेटियां और परिवार भी फैसले की अहम वजह

दिव्या मित्तल ने अपने परिवार और दो बेटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि आगे वह परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने पुराने शौक और रुचियों को भी समय देना चाहती हैं। हालांकि, भविष्य में वह किस क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय होंगी, इसे लेकर उन्होंने अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की है।

अब नई राह की ओर दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद उनके प्रशासनिक सफर की चर्चा हो रही है। मेरठ से शुरू हुई उनकी यात्रा गोंडा, कानपुर, बरेली, संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से होकर गुजरी। हालांकि, विदाई संदेश में मिर्जापुर और देवरिया का खास जिक्र यह बताता है कि इन दोनों जिलों से जुड़ी यादें उनके प्रशासनिक जीवन में विशेष स्थान रखती हैं।