योगीराज में तबादले, कामकाज सुधारने को नौकरशाही पर दांव

उत्तर प्रदेश की सत्ता में सौ दिन पूरे कर चुकी योगी आदित्यनाथ सरकार अब नौकरशाही पर दांव लगा रही है। सौ दिनों में दर्जन भर से अधिक बार ताश के पत्तों की तरह अफसर फेंटे गए, फिर भी तमाम अफसर अभी तक पुरानी कुर्सियों पर ही डटे हैं

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Jul 06, 2017
Yogi IAS IPS reshuffle
डॉ. संजीव
लखनऊ. सौ दिन, औसतन हर हफ्ते नौकरशाही के सर्वोच्च संवर्ग (आईएएस-आईपीएस) के तबादले और शीर्ष पर भ्रम की स्थिति। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अफसरशाही पर नकेल का आंकलन करना हो तो बस यही कहा जा सकता है। रामराज्य की परिकल्पना के बीच उत्तर प्रदेश में आम जनमानस भले ही बड़ा बदलाव न महसूस कर रहा हो, किन्तु सरकार ने अब नौकरशाही पर आखिरी दांव खेला है। सौ दिन की सरकार के जश्न के बीच ही मुख्यमंत्री ने न सिर्फ अपना प्रशासनिक मुखिया (मुख्य सचिव) बदला, बल्कि 115 अन्य अफसर भी इधर से उधर किये।

पिछली सरकारों पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार पिछले सौ दिनों से नौकरशाही को स्थायित्व देने में जुटी है। जिस समय़ योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने थे, उस समय राहुल भटनागर के पास मुख्य सचिव के रूप में सूबे के प्रशासनिक अमले की कमान थी तो डीजीपी जावीद अहमद पुलिस को संभाल रहे थे। शुरुआती दिनों में डीजीपी व मुख्य सचिव को न बदलकर मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार अफसरों के प्रति सकारात्मक नजरिये से आगे बढ़ेगी। यह अधिक दिन न चल सका। 21 अप्रैल को सरकार ने डीजीपी जावीद अहमद को विदा कर सुलखान सिंह को प्रदेश पुलिस की कमान सौंप दी। इसके बाद भी राहुल भटनागर मुख्य सचिव बने हुए थे। सरकार के सौ दिन पूरे होने के जश्न के बीच ही मुख्य सचिव की विदाई का भी फैसला हो गया और दिल्ली से वापस बुलाकर राजीव कुमार को मुख्य सचिव बना दिया गया। अब राजीव कुमार की अगुवाई में प्रदेश सरकार ने अफसरशाही पर दांव लगाया है। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने स्वीकार भी किया कि अभी तक अफसरों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। अब उम्मीद की जा रही है कि अफसर सुधरेंगे और सरकार की मंशा के अनुरूप काम करेंगे।

दिल्ली से बुलाए अफसर

अफसरशाही पर प्रदेश सरकार के दांव का हाल यह है कि सूबे में पहले से तैनात अफसरों पर भी पूरी तरह भरोसा नहीं किया गया। मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश सरकार ने केंद्र से यूपी कॉडर के एक दर्जन अफसर वापस मांगे। सबसे पहले आए अवनीश अवस्थी को पहले मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाने की चर्चा थी, किन्तु उन्हें सूचना विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया। राजीव कुमार तो दिल्ली से बुलाकर मुख्य सचिव बनाए ही गए हैं, संजय भूसरेड्डी, आलोक कुमार, शशिप्रकाश गोयल, प्रशांत त्रिवेदी व अनुराग श्रीवास्तव को भी अहम जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं।

कुछ का जलवा कायम

प्रदेश सरकार की तमाम कोशिशों और तमाम बदलावों के बावजूद कुछ पुराने अफसरों का जलवा बदस्तूर कायम है। पूरे घर के बदल डालने की इच्छाशक्ति दिखाने वाली सरकार में आज भी कई प्रमुख विभागों के अफसर उन्हीं कुर्सियों पर डटे हैं। पिछली सरकार के कुछ लाड़ले, आरोपी व दागी अफसरों को भी मजबूत विभाग सौंप दिये गए हैं। सरकार ने आने के तुरंत बाद जिस रफ्तार से अफसरों के तबादले किये थे, उसमें कुछ अफसर तो खो से गए हैं। तमाम को हटाए जाने के बाद अभी भी नियुक्ति का इंतजार है और वे घर बैठकर बिना काम किये वेतन ले रहे हैं।


IAS IPS Trasnfer

प्रशासन दिग्भ्रमित, काम प्रभावित

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल मानते हैं कि मौजूदा सरकार में पूरा प्रशासन दिग्भ्रमित है। दरअसल सत्ता में आने से पहले आप चाहे जो चिल्लाएं, सत्ता में आने के बाद फैसले ठंडे दिमाग से लिए जाते हैं, तभी वे संतोषजनक होते हैं। योगी सरकार अराजक ढंग से फैसले ले रही है। इसी कारण तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक ढांचा ठीक से तैयार नहीं हो सका है। तमाम पुराने व दागी अफसर आज भी सत्ता के मजबूत स्तंभ बने हुए हैं।

समयबद्ध विकास का संकल्प

प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार का मानना है कि अफसरशाही पर दांव जैसी बात तो नहीं है किन्तु सभी ने प्रदेश के समयबद्ध विकास का संकल्प लिया है। हर विभाग से कामकाज सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना मांगी गयी है। सभी को उसी के अनुरूप काम करना होगा। सरकार की मंशा स्पष्ट करने के लिए संकल्प पत्र है ही। ऐसे में सभी अधिकारी मिलकर विकास के एजेंडे को पूरा करेंगे। उत्तर प्रदेश में ढेरों संभावनाएं हैं और हमारा लक्ष्य उन्हीं संभावनाओं को मजबूती के साथ अमल के धरातल पर उतारना है।

एक बार बना लें मजबूत टीम

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र दि्ववेदी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अफसरों की टीम का मनोबल मजबूत रखकर ही सर्वश्रेष्ठ परिणाम पाए जा सकते हैं। इसमें छवि के साथ निरंतरता व कार्यक्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। सरकार को चाहिए कि एक बार मजबूत टीम बना लें। इस समय तबादले का मौसम है, तो तबादले अतिशयोक्ति नहीं कहे जाएंगे, किन्तु यदि यही लगातार हुआ तो सवाल उठेंगे। एक बार मजबूत टीम बनने के बाद सरकार की इच्छाशक्ति के साथ सकारात्मक परिणाम भी आएंगे, कानून व्यवस्था सुधरेगी और विकास होता दिखेगा।
Published on:
06 Jul 2017 12:50 pm
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