
Sikar Protest PIC
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में विकास की बड़ी परियोजनाओं और किसानों की आजीविका के बीच एक नया टकराव खड़ा हो गया है। सीकर के तारपुरा इलाके में बनने वाले नए प्रस्तावित एयरपोर्ट को लेकर ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं। सोमवार को कड़कड़ाती धूप के बीच कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज उठा। दरअसल, इस साल के राज्य बजट में राजस्थान सरकार ने सीकर के तारपुरा में एक नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए सर्वे कराने की घोषणा की थी। जैसे ही जिला प्रशासन ने धरातल पर सर्वे की तैयारियां शुरू कीं, वैसे ही स्थानीय गांवों के किसानों की रातों की नींद उड़ गई। स्थानीय स्तर पर कई दिनों तक चली महापंचायतों और बैठकों के बाद अब यह आंदोलन जिला मुख्यालय तक पहुँच चुका है।
आंदोलन कर रहे किसानों और बेरी-तारपुरा क्षेत्र के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिला प्रशासन एयरपोर्ट परियोजना के नाम पर दो-तीन गांवों की करीब 4000 बीघा उपजाऊ जमीन को जबरन अधिग्रहित करने की तैयारी में जुटा है।
किसानों ने कलेक्ट्रेट पर अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, "हमारे इलाकों में पहले नवलगढ़-बेरी-बसावा सीमेंट प्लांट की रेलवे लाइन के नाम पर खेतों को काटा गया। अब बची-कुची कसर इस नए प्रस्तावित एयरपोर्ट ने पूरी कर दी है। अगर रेलवे लाइन और हवाई अड्डे दोनों के लिए हमारी जमीनें ले ली जाएंगी, तो शेखावाटी के किसान के पास खेती के लिए एक इंच जमीन भी नहीं बचेगी। हम अपनी ही धरती पर भूमिहीन और अनाथ हो जाएंगे।"
कलेक्ट्रेट के बाहर एक बड़ी जनसभा करने के बाद किसानों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक 8 सूत्री मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र में किसानों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें रखी हैं:
लिखित सहमति अनिवार्य हो: किसी भी किसान की जमीन का अधिग्रहण तब तक न किया जाए, जब तक कि संबंधित ग्राम सभा और खुद काश्तकार इसके लिए अपनी लिखित सहमति न दे दें।
सीधा संवाद करे प्रशासन: जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी बंद कमरों में योजनाएं बनाने के बजाय प्रभावित गांवों में आकर सीधे किसानों के साथ टेबल पर बातचीत करें।
अंडरपास की डिजाइन पर आपत्ति: जेरठी-दादिया अंडरपास की वर्तमान डिजाइन और जगह को लेकर ग्रामीणों को गंभीर तकनीकी आपत्तियां हैं, जिन्हें तुरंत दूर किया जाए।
बंजर भूमि का हो इस्तेमाल: सीमेंट प्लांट रेलवे लाइन के लिए किसानों के लहलहाते खेतों को बर्बाद करने के बजाय, सर्वे का रूट बदलकर उसे सरकारी बंजर भूमि या खेतों से दूर रास्तों से निकाला जाए।
सीकर के इस किसान आंदोलन को अब व्यापक राजनीतिक समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। धरने को संबोधित करने खुद सीकर के वरिष्ठ विधायक राजेंद्र पारीक कलेक्ट्रेट पहुंचे।
विधायक राजेंद्र पारीक ने कहा, "खेती ही शेखावाटी के किसानों के रोजगार और उनकी पूरी आजीविका का एकमात्र मुख्य आधार है। यदि सरकार और प्रशासन ने विकास के नाम पर किसानों से उनकी पुश्तैनी और पैतृक जमीनें छीन लीं, तो ग्रामीण क्षेत्रों की पूरी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। यह किसान विकास विरोधी नहीं है, बल्कि अपनी पहचान और रोजी-रोटी बचाने के लिए सड़क पर उतरा है।"
उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल का बयान: "तारपुरा, बेरी और दादिया की जमीनें बेहद उपजाऊ और उपजाऊ (Fertile) श्रेणी की हैं। यहाँ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने का मतलब है कि इस पूरे बेल्ट के सैकड़ों किसान परिवारों को अपने ही पैतृक गांवों से जबरन पलायन (Migration) करना पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
सीकर में हुए इस बड़े प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न विचारधाराओं के नेता किसानों के हक में एक मंच पर नजर आए। जनसभा को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के जिलाध्यक्ष महेंद्र डोरवाल, सुरजीत भींचर, पूर्व सरपंच श्रवण सिंह शेखावत, दादिया प्रशासक भवानी शंकर, सतपाल धींवा, विजेंद्र सिंह काजला और भागीरथ सिंह जेरठी ने संबोधित किया।
इसके अलावा कांग्रेस ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश फौजी, दादिया के पूर्व सरपंच मोहन लाल मातवा, एडवोकेट मधुसूदन शर्मा, बजरंग सिंह शेखावत, कुशलपुरा प्रशासक राकेश बलोदा, सरपंच राजेश भास्कर, भागीरथ शर्मा, सुरेंद्र सिंह शेखावत, महिपाल धायल और चरण सिंह ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जबरन सर्वे की कोशिश की, तो आंदोलन को पूरे शेखावाटी और राजस्थान स्तर पर उग्र किया जाएगा।
किसी भी राज्य के विकास के लिए नए एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बेहद जरूरी होते हैं, लेकिन इसकी कीमत अगर अन्नदाता को अपनी उपजाऊ जमीनें गंवाकर चुकानी पड़े, तो कल्याणकारी सरकार के दावों पर सवाल उठते हैं। भजनलाल सरकार के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वे सीकर के इन किसानों की चिंताओं का समाधान कैसे करते हैं। क्या सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़ेगी और किसानों के साथ सीधे संवाद के जरिए इस गतिरोध को खत्म करेगी, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
Published on:
19 May 2026 12:15 pm
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