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हरियाणा-दिल्ली में जिस काम के 38 हजार, राजस्थान में सिर्फ 22 हजार…वो भी 14 महीने से अटके, ऐसा भेदभाव क्यों?

राजस्थान के वोकेशनल शिक्षक पिछले 14 महीनों से वेतन भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने वेतन वृद्धि की घोषणा तो की, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। शिक्षकों का कहना है कि हरियाणा-दिल्ली में इसी काम के लिए करीब 38 हजार रुपए मिलते हैं, जबकि राजस्थान में सिर्फ 22 हजार रुपए दिए जा रहे हैं।
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सीकर

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Arvind Rao

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Updated: 18 May 2026, 2:26 PM IST

Vocational Teachers Salary Hike Rajasthan

Vocational Teachers Salary Hike Rajasthan (Photo-AI)

Rajasthan Vocational Teachers Salary: सीकर: सरकारी स्कूलों के बच्चों को रोजगार का प्रशिक्षण देने वाले व्यवसायिक शिक्षकों (वीटी) का हाल-बेहाल है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में वीटी का वेतन 36,500 और दिल्ली में 38,100 कर दिया गया है। लेकिन प्रदेश में टीडीएस काटने के बाद शिक्षकों को अब भी 19 हजार 800 रुपए मिल रहे हैं। वो भी 14-14 महीनों से अटके हैं। टेंडर में देरी से रोजगार भी लगातार नहीं मिल रहा।

ऐसे में वीटी को अद्ध बेरोजगारी के साथ भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। खास बात ये भी है कि पिछले साल सरकार ने इनके वेतन में 15 फीसदी बढ़ोतरी की जो घोषणा की, वह भी अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में व्यवसायिक प्रशिक्षण को लेकर कितनी गंभीरता है।

न नियमित नौकरी और न ही वेतन

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में साल 2022-23 में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए वीटी लगाए गए थे। टीडीएस काटने के बाद इनके करीब 18 हजार रुपए वेतन मिल रहा था। पर दो साल में टेंडर पूरा होने पर वीटी करीब एक साल के लिए बेरोजगार हो गए हैं।

मार्च 2025 में टेंडर हुआ तो फिर भ्रष्टाचार का खेल उजागर होने पर टेंडर रद्द हुए। नए टेंडर के बाद वीटी नियुक्त हुए तो निविदा अवधि अगले महीने पूरी होने पर इनके सामने फिर सेवा समाप्ति का संकट गहरा गया है। वेतन के हालात ये हैं कि वीटी को 10 से 14 महीने से वेतन नहीं मिला है।

कभी कंपनी तो कभी बजट में ढिलाई

पत्रिका पड़ताल में वीटी को समय पर वेतन नहीं मिलने की दो बड़ी वजह सामने आई हैं। पहली कमी तो प्लेसमेंट एजेंसियों की है, जो खुद ही वीटी के वेतन की मांग समसा में चार-चार महीने की देरी से भेजती है। फिर जब फाइल पहुंचे तो कभी सरकार की ओर से समय पर बजट नहीं मिल पाता। ऐसे में वीटी का वेतन का इंतजार 10-10 महीने तक लंबा खिंच रहा है।

घोषणा के बाद सरकार भूली वेतन वृद्धि

हरियाणा में इसी साल वीटी का वेतन बढ़कर 36,500 और दिल्ली में 38,100 रुपए कर दिया है। वहीं, प्रदेश में अब भी 22 हजार रुपए है। राज्य सरकार ने पिछले साल वीटी के मानदेय में 1500 रुपए बढ़ोत्तरी की घोषणा जरूर की, लेकिन एक साल बाद भी वह लागू नहीं हो पाई। वेतन वृद्धि और वेतन दोनों रुकने से वीटी की परेशानी बढ़ी हुई है।

16 ट्रेड में लगे थे 5,155 शिक्षक

प्रदेश में 2015 में सरकारी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा शुरू हुई थी। इसके लिए सरकार प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिये वीटी नियुक्त करती है। पिछले सत्र में चार हजार स्कूलों में इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, ब्यूटी-वेलनेस, कंप्यूटर-आइटी व फैशन डिजाइनिंग सहित 16 ट्रेड के 5155 वीटी नियुक्त किए थे, जिनमें से सैंकड़ों शिक्षकों को योग्यता व अन्य मापदंडों के आधार पर बीच में ही निकाल दिया गया।

सीधे नियुक्त करे सरकार

वेतन नहीं मिलने से व्यवसायिक शिक्षकों की आर्थिक व मानसिक परेशानी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सरकार को खुद ही संविदा व नियमित आधार पर व्यवसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर उनके नियमित भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए।

केस नंबर 1: 14 महीने से वेतन का इंतजार

राउमावि गुरारा में वीटी निर्मला स्वामी ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड की प्रशिक्षक हैं। उन्हें पिछले 14 महीने से वेतन नहीं मिला है। समय पर वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

केस नंबर 2: 13 महीने से अटका वेतन

मारु स्कूल में ब्यूटी व वेलनेस ट्रेड में नियुक्त वीटी रीना शर्मा को अभी तक अप्रैल 2025 तक का भुगतान हुआ है। उन्हें पिछले 10 महीने के वेतन का इंतजार है।

इनका कहना है…

प्रदेश में हजारों शिक्षकों का 10 से 14 महीने से मानदेय अटका हुआ है। मानदेय वृद्धि व नियमितीकरण के लिए प्रदेश के 60 जनप्रतिनिधियों व भाजपा पदाधिकारियों से सरकार को सिफारिश करवाई जा चुकी है। लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। पिछले साल का बढ़ा हुआ वेतन भी नहीं मिला है। इससे वीटी आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं।
-पवन गर्ग, अध्यक्ष, व्यवसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति