
UP Politics: उत्तर प्रदेश के बंटवारे की पुरानी राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। देवरिया के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महारैली’ में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश 4 हिस्सों में बंट सकता है। राजभर ने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग को भी अपने बयान से जोड़ते हुए कहा कि यदि भविष्य में पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो उस राज्य का मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही होगा। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के विभाजन और अलग पूर्वांचल राज्य की पुरानी मांग को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है। उनके इस बयान पर मंत्री अनिल राजभर ने प्रतिक्रिया दी है।
मंत्री अनिल राजभरने मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान 'यूपी 4 हिस्सों में बंटेगा, पूर्वांचल राज्य बना तो राजभर का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा…', पर कहा, "हम सब लोग लगातार 60 और 70 के दशक से ये बात सुन रहे हैं, जनता तो धैर्य के साथ सारी चीज का इंतजार कर रही है। मैं अपने सहयोगी दल के साथियों से भी कहूंगा कि वो भी धैर्य बनाए रखें। आज देश के अंदर प्रधानमंत्री मोदी की समर्थवान सरकार चल रही है। देश के हित में जो कुछ भी होगा और प्रदेश के हित में भी जो कुछ होगा, वो हम सब लोगों को मोदी जी के ऊपर छोड़ना चाहिए… हम सब लोग ये भी जानते हैं कि किसी भी प्रदेश के बंटवारा करने का अधिकार देश की सरकार के पास है, मोदी जी के पास है, उनकी सरकार के पास है, तो हम सब लोगों को भरोसा रखना चाहिए, विश्वास रखना चाहिए, मोदी जी का जो फैसला है, वही प्रदेश के हित में भी है और देश के भी हित में है, सब लोगों को इस बात को मानना चाहिए, उसी आधार पर अपने बयान भी देने चाहिए और आगे भी चलना चाहिए।"
बता दें कि देवरिया में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश का 4 हिस्सों में बंटना आने वाले समय में तय है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर संगठन को मजबूत करने और जमीन पर काम करने की अपील की। राजभर ने अपने भाषण में पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की संभावना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर अलग पूर्वांचल राज्य अस्तित्व में आता है तो उसके नेतृत्व में राजभर समाज की भी भूमिका होनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि नए पूर्वांचल राज्य की पहली मुख्यमंत्री की कुर्सी पर राजभर का बेटा बैठेगा। राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं।
रैली में ओम प्रकाश राजभर ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने 27 फीसदी OBC आरक्षण के भीतर अलग-अलग पिछड़ी जातियों के बीच हिस्सेदारी तय करने की मांग की। राजभर का तर्क था कि आरक्षण का लाभ पिछड़े वर्ग की सभी जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी वर्ग की आबादी अधिक है तो उसे उसी अनुपात में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने राजभर समाज को भी आबादी के आधार पर आरक्षण का लाभ दिए जाने की बात कही। उनके मुताबिक, पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ कुछ चुनिंदा जातियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए और दूसरी पिछड़ी जातियों को भी उनकी संख्या के अनुरूप हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
ओम प्रकाश राजभर ने अपने भाषण में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक देश और प्रदेश की राजनीति में शासन किया, जबकि सपा और बसपा भी उत्तर प्रदेश की सत्ता में कई बार रही हैं। राजभर ने सवाल उठाया कि इतने लंबे राजनीतिक दौर के बावजूद पिछड़े समाज को उसके अनुपात में राजनीतिक और सामाजिक हिस्सेदारी कितनी मिली। उन्होंने अपने समर्थकों से सपा, बसपा और कांग्रेस की ओर जाने के बजाय सुभासपा के साथ बने रहने की अपील की। राजभर ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले करीब 10 वर्षों से सरकार के साथ है और इस दौरान उनके समाज के लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है।
उत्तर प्रदेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की मांग नई नहीं है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने विधानसभा में प्रदेश के पुनर्गठन का प्रस्ताव पारित किया था। इसमें उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों—पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश—में बांटने की बात कही गई थी। तत्कालीन सरकार ने विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा था। हालांकि, यह प्रस्ताव आगे राज्य के औपचारिक पुनर्गठन में तब्दील नहीं हो सका। अलग पूर्वांचल राज्य की मांग भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर उठती रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से आवाज उठाई जाती रही है।
ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान के बावजूद फिलहाल उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने को लेकर कोई नया प्रशासनिक या सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में देवरिया की रैली में दिया गया बयान फिलहाल राजनीतिक दावे और मांग के तौर पर ही देखा जा रहा है।राजभर ने इस मुद्दे को पिछड़े समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और पूर्वांचल की अलग पहचान से जोड़कर पेश किया। आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस तरह जगह बनाता है, यह राजनीतिक दलों की रणनीति और इस मांग को मिलने वाले समर्थन पर निर्भर करेगा।