
Imran Masood Latest News: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के 7 साल पूरे होने, RSS प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई में जेनजी छात्रों से संवाद कार्यक्रम और परिसीमन जैसे मुद्दों पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के समय किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, युवाओं और परिसीमन के मुद्दे पर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
इमरान मसूद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के सात साल बाद भी अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक कितने विस्थापित कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास हुआ, राज्य में कितना औद्योगिक विकास हुआ और क्या आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो गया। उन्होंने कहा यदि इन मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति होती तो फैसले के परिणाम स्पष्ट दिखाई देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, '' आज भी जम्मू-कश्मीर के हालात में बदलाव नहीं हुआ। अनुच्छेद 370 हटाते समय किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ।''
कांग्रेस सांसद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त करने के पीछे जो तर्क दिए गए थे, उनका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि यदि विकास और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलते तो स्थिति अलग होती, लेकिन फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिखाई देते।
मुंबई में RSS प्रमुख मोहन भागवत के जेनजी और जेनअल्फा छात्रों के साथ प्रस्तावित संवाद कार्यक्रम पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल संवाद आयोजित करने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उनका आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था और संस्थानों को प्रभावित करने में RSS की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों को स्वतंत्र और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए।
इमरान मसूद ने इससे पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर PM नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुई घटनाओं को लेकर सरकार को गंभीरता से जवाब देना चाहिए। उनका दावा था कि देशभर में युवा अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि विभिन्न राज्यों में युवा शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं का समाधान संवाद और ठोस नीतिगत फैसलों के माध्यम से किया जाना चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर इमरान मसूद ने कहा कि इस विषय पर सभी राज्यों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि इस प्रक्रिया में संतुलन नहीं रखा गया तो इसका असर देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों के संदर्भ में अपनी चिंता व्यक्त की।