सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंटेंसिव कल्टीवेशन ऑफ वेजीटेबल्स एंड फ्रूट्स प्रोग्राम के तहत खेती किसानी को बल मिलेगा
लखनऊ. खराब फसलों से परेशान अक्सर कई किसान मौत को गले लगा लेते हैं। उनकी परेशानी का समाधान निकालने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंटेंसिव कल्टीवेशन ऑफ वेजीटेबल्स एंड फ्रूट्स प्रोग्राम के तहत खेती किसानी को बल मिलेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंटेंसिव कल्टीवेशन ऑफ वेजीटेबल्स एंड फ्रूट्स प्रोग्राम बुंदेलखंड में बनाया जाएगा। इसके लिए फंडिंग सरकार की तरफ से की जाएगी। इसके अंतर्गत बुंदेलखंड में कई फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी, जिन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस बात की घोषणा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने की है। इन्होंने कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन से मिलकर इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने का निर्देश दिया है।
अलग-अलग सब्जियों और फलों के लिए बनेगा मॉडल
सीएसए विवि. से संबद्ध शाक भाजी अनुसंधान में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मॉडल तैयार किया जाएगा। इसमें नए पुराने कई तरह के शोध कार्यों का उपयोग किया जाएगा। संस्थान में अलग-अलग सब्जियों और फलों के लिए मॉडल तैयार किया जाएगा।
सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के प्रो. सुशील सोलोमन के मुताबिक फलों और सब्जियों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मॉडल तैयार कर रही है। इसके बनने से खेती की तकनीक विकसित होगी। पैदावार भी बढ़ेगी जिससे कि किसानों को लाभ मिलेगा।
नई तकनीक का होगा इस्तेमाल
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंटेंसिव कल्टीवेशन ऑफ वेजीटेबल्स एंड फ्रूट्स प्रोग्राम के लिए केला, पपीता, अमरूद, बैंगन सेत कई फलों और सब्जियों को वरीयता दी जाएगी। इसके लिए ऐसी नई तकनीक विकसित की जाएंगी, जिससे कि कम पानी में ही बेहतर उत्पाद मिल सके। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण से चिप्स, जूस और जैली के निर्माण की तैयारी की जाएगी। कुछ चिप्स की इकाईयां कानपुर और कन्नौज में भी लगाई जाएंगी।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय बुंदेलखंड के दौरे पर थे। यहां उन्होंने कहा था कि बुंदेलखंड में सिंचाई की योजनाओं को पूरा करेंगे और किसानों की समस्या का समाधान निकालेंगे।