- कौशलेन्द्र बिक्रम सिंह
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक है, जल्द ही आचर संहिता लगने की संभावनाएं भी प्रबल हैं। ऐेसे में नोटबंदी का मुद्दा हर दल अपने-अपने हिसाब से भुनाने में जुटा हुआ है। भाजपा जहां इसे भ्रष्टाचार पर चोट और कालाधन निकालने वाला बताने की पुरजोर कोशिश कर रही है तो कांग्रेस इन दिनों मोदी और उनके फैसलों पर प्रहार करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है।
एक ओर जहां भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस से राहुल गांधी भी मैदान में उतर चुके हैं। दोनों ही नेता उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। मोदी ने अभी हाल ही में 11 दिसंबर को बहराइच में (फोन से) 19 दिसंबर को कानपुर में रैली की थी गुरुवार को वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हैं तो 2 जनवरी को लखनऊ में होंगे। वहीं दूसरी ओर 19 दिसंबर को राहुल गांधी ने जौनपुर में जनसभा को संबोधित किया था वहीं गुरुवार को वे बहराइच में मोदी पर हमला बोलने और चुनावी हुंकार भरने की तैयारी में हैं।
11 दिसंबर को मोदी की बहराइच में रैली थी, वे लखनऊ एयरपोर्ट अपने विशेष विमान से उतरे और हेलिकॉप्टर से रैली स्थल तक गए लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा। दरअसल, कोहरे के चलते दृश्यता कम होने की वजह से हेलिकॉप्टर नीचे नहीं उतर पाया। जिसके बाद मोदी ने लखनऊ से ही फोन द्वारा रैली को संबोधित किया।
अब 22 दिसंबर को उसी बहराइच में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली है। पहले उन्हें भी विशेष विमान से लखनऊ उतर कर हेलिकॉप्टर से बहराइच जाना था। लेकिन, कोहरे को ध्यान में रखते हुए ऐन मौके पर उनका प्लान बदल दिया गया। राहुल गांधी अब सड़क मार्ग से कार द्वारा बहराइच जा रहे हैं।
मोदी और राहुल के दौरों में कोहरा ही एक संयोग नहीं है, अगर आप गौर करें तो एक अजब संयोग नजर आएगा। मोदी 19 दिसंबर को जब अवध प्रदेश (कानपुर) में थे तो राहुल पूर्वांचल (जौनपुर) में जवाबी रैली कर रहे थे। अब जब मोदी 'पूर्वांचल' (वाराणसी) में हैं तो राहुल गांधी 'अवध प्रदेश' (बहराइच) से उनके आरोपों का जवाब की तैयारी में हैं।