लखनऊ

Jyeshtha Maas 2026: 8 बड़े मंगल से लखनऊ में भक्ति का सैलाब, मंदिरों में तैयारी तेज, भंडारों की धूम

Jyeshtha Maas: ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ लखनऊ में भक्ति का माहौल गहरा गया है। इस बार 8 बड़े मंगल पड़ने से मंदिरों, भंडारों और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।
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May 02, 2026
मंदिरों की सफाई से लेकर भंडारों की तैयारियां पूरी, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन सतर्क (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
मंदिरों की सफाई से लेकर भंडारों की तैयारियां पूरी, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन सतर्क (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Jyeshtha Month Begins: धार्मिक आस्था और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध राजधानी लखनऊ में ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ ही भक्ति का माहौल चरम पर पहुंच गया है। इस बार ज्येष्ठ मास खास होने जा रहा है, क्योंकि अधिक मास के कारण पूरे दो महीनों तक चलने वाले इस पावन काल में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। इसे लेकर शहर के प्रमुख हनुमान मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं और प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम कर रहा है।

मंदिरों में सफाई और सजावट का दौर

ज्येष्ठ मास के आरंभ के साथ ही शहर के सभी प्रमुख हनुमान मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य तेज कर दिया गया है। मंदिर परिसर को स्वच्छ और आकर्षक बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। फूलों, रोशनी और धार्मिक सजावट से मंदिरों को भव्य रूप दिया जा रहा है, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को एक दिव्य वातावरण का अनुभव हो। हर साल की तरह इस बार भी बड़े मंगल पर लाखों की संख्या में भक्त हनुमान जी के दर्शन करने पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समितियां पहले से ही तैयारियों में जुटी हुई हैं।

भक्तों की भीड़ को लेकर विशेष प्रबंध

ज्येष्ठ मास में विशेषकर मंगलवार के दिन, जिन्हें ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है, हनुमान मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। इस बार 8 बड़े मंगल होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी की संभावना है। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, कतार प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन मिलकर ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुचारू बनाए रखने की योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि शहर में जाम की स्थिति न बने।

ऑनलाइन सूचना से आसान हुआ आयोजन

भंडारे और बड़े आयोजनों को लेकर प्रशासन ने इस बार व्यवस्था को और सरल बनाया है। सरकारी नियमों के तहत अब आयोजकों को अपने भंडारे या धार्मिक कार्यक्रम की सूचना ऑनलाइन माध्यम से पुलिस को देनी होती है। यदि किसी को फॉर्म भरने में परेशानी होती है, तो नजदीकी थाने में मौजूद अधिकारी उन्हें पूरी सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और आयोजनों को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिल रही है।

भंडारों में दिखेगा स्वाद और सेवा का संगम

ज्येष्ठ मास के दौरान लखनऊ की एक खास पहचान भंडारों की परंपरा है। इस बार भी शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर भंडारों का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।

भंडारों में भक्तों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। इनमें आइसक्रीम, ठंडई, छोला-चावल, डोसा, इडली, पूरी-सब्जी, गुड़-चना, खीर, कढ़ी-चावल, कोल्ड ड्रिंक, कचौड़ी सहित कई अन्य स्वादिष्ट पकवान शामिल हैं। पहले इन व्यंजनों का भोग हनुमान जी को अर्पित किया जाएगा और उसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती है।

क्या कहते हैं धर्म विशेषज्ञ

पंडित शक्ति मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई से हो चुकी है और यह 29 जून तक चलेगा। अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, के कारण इस बार ज्येष्ठ माह की अवधि लंबी हो गई है। उन्होंने बताया कि इस बार कुल 8 बड़े मंगल पड़ेंगे, जिनकी तिथियां इस प्रकार हैं:

  • मई में: 5, 12, 19 और 26
  • जून में: 2, 9, 16 और 23

इनमें से 4 ‘शुद्ध ज्येष्ठ मंगल’ 5 और 12 मई तथा 16 और 23 जून को पड़ेंगे। वहीं 17 मई से 15 जून तक अधिक ज्येष्ठ मास रहेगा, जिसमें 19 और 26 मई तथा 2 और 9 जून को ‘अधिक ज्येष्ठ मंगल’ मनाए जाएंगे।

यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए लखनऊ में यातायात व्यवस्था को लेकर भी विशेष प्लान तैयार किया गया है। बड़े मंगल के दिन प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जा सकता है। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके। लोगों से अपील की जा रही है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें और प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें।

धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक

ज्येष्ठ मास और बड़े मंगल का पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी प्रतीक है। इस दौरान हर वर्ग और समुदाय के लोग मिलकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। भंडारों में बिना किसी भेदभाव के सभी को प्रसाद वितरित किया जाता है, जो समाज में एकता और समानता का संदेश देता है।

Updated on:
02 May 2026 10:53 am
Published on:
02 May 2026 10:53 am
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