लखनऊ

दलित एजेंडा के तहत ये हो सकते हैं भाजपा के नए अध्यक्ष, अटकलें जोरों पर

भारत बंद को बसपा का समर्थन मिलने के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चिंता में है।  
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Apr 11, 2018
Keshav Prasad

लखनऊ. योगी सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को फिर से यूपी की कमान मिल सकती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राजधानी में हैं। कई दिनों से शाह के दौरे को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार और संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल होंगे। पिछले दियों भारत बंद के दौरान जिस तरह से दलितों ने अपनी ताकत दिखाई थी और बसपा ने उनका साथ दिया था उससे भाजपा नेतृत्व सोचने पर विवश हो गया है। सूत्रों की मानें तो पार्टी दफ्तर में दिन भर यही कयास चल रहे थे कि ओबीसी या दलित चेहरे में से किसे प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है।

इन अटकलों में केशव प्रसाद मौर्य ही सबसे फेवरेट नजर आए। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर संगठन में फेरबदल होने की संभावना है। माना जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य को फिर से प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिल सकती है। वहीं कुछ दलित चेहरों को मंत्री मंडल में जगह दी जा सकती है तो कई वरिष्ठ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। कुछ को संगठन में भेजा जा सकता है तो कुछ संगठन के चेहरों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है।
इसलिए केशव पर हो रही है चर्चा
2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, उसमें केशव प्रसाद मौर्या का बड़ा योगदान रहा है। केशव प्रसाद मौर्य ने पिछड़ी जातियों को पार्टी से जोडऩे में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने विरोधी दलों के कई मजबूज पकड़ रखने वाले नेताओं को पार्टी से जोड़ा था, जिसका चुनाव में भाजपा को बड़ा फायदा भी मिला था। अब 2019 में लोकसभा का चुनाव होने जा रहा है। सपा-बसपा की जिस तरह से नजदीकियां बढ़ रहीं हैं उससे भाजपा को बड़ी चिंता होना लाजमी है। ऐसे में भाजपा प्रदेश की कमान फिर से केशव प्रसाद मौर्य को सौंप सकती है। जिससे पिछड़ों को अपने पाले में फिर से लाया जा सके।

सरकार में दलित चेहरा क्यों?
एससी-एसटी मामले में शीर्ष कोर्ट द्वारा मामला दर्ज होने के बाद तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जांच के बाद गिरफ्तारी की बात का दलितों ने विरोध किया था और भारत बंद का आयोजन किया था। इस दौरान भाजपा शासित यूपी, एमपी और बिहार में जमकर बवाल हुआ था। बंद के दौरान कई लोगों की हत्या की खबरें भी आई थीं। भारत बंद को बसपा ने भी अपना समर्थन दिया था। इसके बाद से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व काफी चिंता में है। उसे दलित वोटों के छिटकने का डर सता रहा है। यूपी में 24 प्रतिशत दलित हैं। ये दलित वोट 2014 के लोकसभा व 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के पाले में आया था। लेकिन पिछले दिनों बसपा और सपा के साथ आने से इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि अब कहीं यह वोट भाजपा के हाथ से निकल न जाएं।

Published on:
11 Apr 2018 08:59 pm