लखनऊ

सीएम योगी के काफिले के सामने हुआ ऐसा हादसा, सिपाही पहुंचा अस्पताल, हैरान करने वाली वजह आई सामने

नाबालिग को वाहन थमाने का खामियाजा कैसे पिता को भुगतना पड़ेगा, इसका उदाहरण राजधानी लखनऊ में पेश हुआ है।

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Sep 17, 2019
Yogi
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लखनऊ. नाबालिग को वाहन थमाने का खामियाजा कैसे पिता को भुगतना पड़ेगा, इसका उदाहरण राजधानी लखनऊ में पेश हुआ है। यहां नाबालिग ने पिता की गाड़ी से एक सिपाही को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसके हाथ पैर टूट गए। लड़के को पुलिस ने पकड़ लिया, जांच में पता चला कि वह नाबालिग है। ऐसे में अब उसके पिता के खिलाफ संशोधित मोटल व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। यह मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद पहला मामला होगा, जिसमें बेटे की गलती का अंजाम पिता को भुगतना पड़ेगा। आरोप साबित होने पर पिता को भी जुर्माना या सजा भुगतनी होगी।

यह था मामला-

मामला जियामऊ (Jiamau) मोड़ का है, जहां रविवार शाम वीआइपी मूवमेंट (VIP movement) के चलते पीजीआइ (PGI) एकता नगर (Etka Nagar) में रहने वाले यातायात पुलिस के हेड कांस्टेबल (Head constable) सूर्य प्रकाश (58) ड्यूटी पर थे। भारतीय प्रबंधन संस्थान IIM-Lucknow से सीएम योगी (CM Yogi) व उनके मंत्रियों को गुजरना था। उनका काफिला 1090 चौराहे (1090 chauraha) पर जैसे ही पहुंचा, सभी यातायात सिपाहियों को अलर्ट कर दिया गया। इस बीच जियामऊ मोड़ (Jiamau Mod) पर तैनात सूर्य प्रकाश (Surya Prakash) ने देखा कि बीच सड़क पर तीन बाइक सवार आ गए हैं, जिन्हें हटाने के लिए वह दौड़ गए। इसी बीच हवा से बाते कर रही बाइक पर सवार किशोर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी जिससे हेड कांस्टेबल का हाथ व पैर टूट गया। तुरंत लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में सिपाही की तहरीर पर पुलिस ने संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया। गाड़ी नंबर के आधार पर वाहन चालक भी हत्थे चढ़ा मगर, जांच में पता चला कि वह तो नाबालिग है। ऐसे में उसे मुचलका भरवाकर जमानत (bail) दे दी गई। लेकिन अब पिता पर इसकी गाज गिरेगी। पुलिस जेजे बोर्ड (Juveline Justice Board) में मामले की रिपोर्ट पेश करेगी। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

पिता को जाना पड़ सकता है-
यह जुर्म बेशक बेटे के हाथ हुआ है मगर, कार्रवाई की तलवार उसके पापा पर भी लटक गई है। संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) की धारा 199-अ (Section 199-A) के तहत किशोर का संरक्षक या वाहन स्वामी उस उल्लंघन का दोषी माना जाएगा। किशोर का किया अपराध दंडनीय होगा। इसके साथ ही उपधारा दो के तहत संरक्षक को तीन वर्ष तक का कारावास और 25 हजार जुर्माना भरना पड़ सकता है। वहीं, प्रयुक्त वाहन की एक साल तक के लिए वैद्यता रद होगी। 25 साल की उम्र से पूर्व किशोर का लाइसेंस नहीं बन सकेगा।

Published on:
17 Sept 2019 05:36 pm