लखीमपुर हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। उसकी जमानत याचिका खारिज हो गयी है। इस बीच उसके मित्र अंकित दास और ड्राइवर शेखर भारती को भी एसआइटी ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक चार जेल में हैं।
लखनऊ. लखीमपुर खीरी कांड में आरोपित पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास काभतीजा अंकित दास भी गिरफ्तार हो गया है। लखनऊ के सदर पुराना किला स्थित आवास पर एसआइटी ने नोटिस चस्पा किया था। इस बीच अंकित दास लखीमपुर खीरी पहुंचा और एसआइटी के सामने सरेंडर कर दिया। उसके ड्राइवर लतीफ को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा मोनू के बाद उसके मित्र अंकित दास के ड्राइवर शेखर भारती को एसआइटी ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा केस में किसानों ने आशीष मिश्रा मोनू के साथ अज्ञात 15 लोगों को नामजद किया है।
बुधवार की सुबह करीब 10.15 बजे लखनऊ के कांटेक्टर अंकित दास कई वकीलों के साथ लखीमपुर पहुंचा और पुलिस लाइन में एसआइटी के सामने पेश हुआ। उधर एक दिन पहले अदालत में पेश अंकित दास के ड्राइवर शेखर भारती को अभियोजन पक्ष ने पुलिस रिमांड पर लेने की अर्जी सीजेएम की अदालत में दाखिल की है जिस पर दोनों पक्षों की ओर से बहस की जा चुकी है।
मुख्य आरोपी आशीष मिश्र को जमानत याचिका खारिज
लखीमपुर कांड के मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट से खारिज हो गई है। आशीष के वकील अवधेश सिंह ने कोर्ट में जमानत याचिका डाली थी। वहीं अन्य आरोपी शेखर भारती को तीन दिन पुलिस कस्टडी में भेजे जाने की संभावना है।
हिंसा की अमरीका में भी चर्चा
लखीमपुर मामले और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष की चर्चा अमरीका में भी हो रही है। वल्र्ड बैंक की बैठक में शामिल होने गईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस बारे में सवाल किया गया। बोस्टन के हार्वर्ड केनेडी स्कूल में एक चर्चा के दौरान सीतारमण से पूछा गया कि प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री लखीमपुर की घटना पर चुप क्यों हैं और जब कोई सवाल किया जाता है तो बचने की कोशिश क्यों की जाती है? इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि लखीमपुर की हिंसा में 4 किसानों का मारा जाना बेशक निंदनीय है, लेकिन देश के दूसरे इलाकों में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। ऐसी हर घटना को बराबरी से उठाना चाहिए, न कि तब जब कि वे आपके माफिक हों। सिर्फ इसलिए यह मुद्दा नहीं उठना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है।