लखनऊ

‘अखिलेश यादव को कांशीराम नहीं, मोइनुद्दीन पसंद हैं, सिर्फ चुनाव के समय आते याद’

Lalji Prasad Nirmal on Akhilesh Yadav : अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तंज कसा है।
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Mar 13, 2026
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अखिलेश यादव पर कसा तंज, PC- Patrika

लखनऊ : अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर दलित राजनीति को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, सपा प्रमुख को बहुजन नायक कांशीराम जी की याद आने लगी है, लेकिन सत्ता में रहते हुए उनके प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती।

डॉ. निर्मल ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने कांशीराम जी के नाम से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थानों और स्थलों के नाम बदल दिए। उन्होंने कहा कि कांशीराम जी के नाम से स्थापित जिले, मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय तक का नाम बदल दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने कांशीराम जी के नाम से बने अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय कर दिया। इसी प्रकार सहारनपुर मेडिकल कॉलेज, जो पहले कांशीराम मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता था, उसका नाम बदलकर महमूदुल हसन नदवी के नाम पर कर दिया गया। इतना ही नहीं, मान्यवर कांशीराम नगर का नाम भी बदलकर कासगंज कर दिया गया।

PDA समाज की हो रही उपेक्षा

उन्होंने कहा कि अब चुनाव नजदीक आते ही दलित समाज के वोट हासिल करने के लिए सपा प्रमुख कांशीराम जी की जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर रहे हैं। सपा के इस तथाकथित पीडीए में अखिलेश सरकार के दौरान दलित समाज हमेशा उपेक्षित ही रहा है। डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में दलित अधिकारियों के साथ भी अन्याय हुआ। उस समय बदले की भावना से कई दलित अधिकारियों का डिमोशन किया गया, जिसके कारण एसडीएम स्तर के अधिकारियों को तहसीलदार बनकर काम करना पड़ा।

सपा को सिर्फ वोट बैंक की चिंता

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दलितों के प्रमोशन में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को भी सपा सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर समाप्त करने का प्रयास किया। सपा की राजनीति में दलितों का सम्मान और अधिकारों की जगह केवल वोट बैंक की चिंता दिखाई देती है। सत्ता में रहते समय जहां दलितों की उपेक्षा की गई, वहीं चुनाव आते ही उन्हें याद करना केवल राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है।

डॉ. निर्मल ने कहा कि दलित समाज अब राजनीतिक दिखावे और अवसरवादी राजनीति को समझ चुका है और वह ऐसे किसी भी प्रयास से भ्रमित नहीं होगा।

Updated on:
13 Mar 2026 09:31 pm
Published on:
13 Mar 2026 09:31 pm