योगी सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी है। अब किसी को भी सीमा संबंधी विवाद में जमीन की पैमाइश के लिए न तो कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे, न ही वकील की फीस देने की समस्या आएगी और न ही राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की जी हुजूरी करनी पड़ेगी।
लोगों को सहूलियत देने और उन्हें बेवजह की दौड़ धूप से बचाने के लिए योगी सरकार ने जमीन की पैमाइश संबंधित फैसले में बदलाव किया है। सीमा संबंधी विवाद में जमीन की पैमाइश के लिए अब न तो कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे, न ही वकील की फीस की समस्या आएगी, न ही राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की जी हुजूरी करनी पड़ेगी। राजस्व परिषद ने जमीन की पैमाइश के लिए आवेदन से लेकर आदेश तक, सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है। इस संबंध में परिषद की आयुक्त एवं सचिव मनीषा त्रिघटिया ने समस्त मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा कि धारा-24 के अंतर्गत सीमा संबंधी विवाद के निपटारे के लिए ऑनलाइन प्रार्थना पत्र प्राप्त करने व उसके निस्तारण की कार्यवाही लागू की गई है। पैमाइश की ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए आरसीसीएमएस पोर्टल पर 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 24 के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन' मॉड्यूल का लिंक उपलब्ध कराया है। इस लिंक पर यूजर मैनुअल व दिशा-निर्देश की प्रति भी उपलब्ध करा दिया गया है। ऑनलाइन आवेदन से पैमाइश के लिए 1000 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। भुगतना होते ही ऑनलाइन आवेदन एसडीएम न्यायालय में दर्ज हो जाएगा।
जारी होगा नोटिस
राजस्व निरीक्षक पैमाइश की तिथि व समय तय करेगा और नोटिस जारी करेगा। तय तिथि पर पैमाइश होने के बाद राजस्व निरीक्षक अपनी रिपोर्ट दर्ज करेगा और संबंधित अभिलेख ल रिपोर्ट एसडीएम न्यायालय में दर्ज कराएगा। एसडीएम ही अंतिम रिपोर्ट मिलने पर फैसला करेगा।