महिलाओं और बच्चों के कल्याण की योजनायें हुई अधिक प्रभावी और पारदर्शी
लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 के अधीन उत्तर प्रदेश राज्य से कुछ भाग को अलग कर दिनांक 09 नवम्बर, 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का गठन किया गया। कार्मिकों के आवंटन की कार्यवाही लगभग पूर्ण हो चुकी है फिर भी राज्य गठन के 16 वर्ष व्यतीत होने के उपरान्त भी कुछ कार्मिकों द्वारा बीच-बीच में प्रत्यावेदन देकर अपना राज्य परिवर्तन किए जाने का अनुरोध किया जाता रहा है। कार्मिकों के राज्य आंवटन हेतु भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय के अधीन राज्य परामर्शीय समिति/परामर्शीय समिति का गठन किया गया है, कार्मिकों के आवंटन के प्रकरण पूर्णरुप से निस्तारित हो जाने की दशा में उक्त समिति को समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है।
यह जानकारी प्रमुख सचिव UP पुनर्गठन समन्वय जितेन्द्र कुमार ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में भारत सरकार द्वारा यह निश्चित किया गया है कि अवशेष जो भी कार्मिक अभी राज्यावंटन कराना चाहते हैं, उन्हंे एक अन्तिम अवसर प्रदान करते हुए उनके प्रकरण का निराकरण कर परामर्शीय समिति को समाप्त कर दिया जाए।
प्रमुख सचिव ने बताया कि वर्तमान प्रचलित नियमों के अधीन यदि कोई कार्मिक अपने राज्य पुनरावंटन हेतु आवेदन करना चाहता है तो वह अपना प्रत्यावेदन उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय अनुभाग-1, कक्ष संख्या 512, पंचम तल, योजना भवन लखनऊ को विलम्बतम दिनांक 30 नवम्बर, 2017 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उक्त तिथि के उपरान्त राज्य पुनरावंटन हेतु प्राप्त आवेदन-पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा।
महिलाओं और बच्चों के कल्याण की योजनायें हुई अधिक प्रभावी और पारदर्शी
एक अन्य बैठक में प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और आश्रय उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं। महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन-181 का विस्तारीकरण, निराश्रित महिला विधवा पेंशन के कड़े नियमों में शिथलीकरण, संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा के बेहतर प्रबंध, जैसी व्यवस्थाएं प्रतिबद्धता से लागू की गई हैं। महिला कल्याण मंत्री आज बापू भवन के सभाकक्ष में प्रदेश सरकार के छः माह के कार्यकाल में विभाग द्वारा किए गये महत्वपूर्ण कार्यों, निर्णयों और योजनाओं पर प्रेस वार्ता कर रही थी।
जोशी ने कहा कि विधवा पेंशन योजना के कड़े नियमों को शिथिल करके बड़े स्तर पर निराश्रित विधवा महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है। अब 60 वर्ष से अधिक उम्र की विधवा महिला को भी पति की मृत्यु उपरान्त पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। अब वे विधवा महिलायें भी पेंशन का लाभ लेने की पात्र हो गई है, जिनके पुत्र बालिग हैं और जिनकी वार्षिक आय अधिकतम 2 लाख रुपये है।