Kanpur: अगर आपने बॉलीवुड फिल्म 'चला मुसद्दी ऑफिस ऑफिस' देखी हो तो आपको बता दें कि कानपुर में भी एक ऐसा ही मामला दोहराया गया। जहां एक महिला के कहने पर लेखपाल साहब ने जिंदा किसान को मुर्दा दिखा दिया। बस फिर क्या पस्त तहसील व्यवस्था में किसान खुद को जिंदा सिद्ध करने में ऑफिस-ऑफिस चक्कर लगा रहा।
कानपुर के बिल्हौर तहसील के एक लेखपाल की कारस्तानी की सजा एक किसान भुगत रहा है। किसान का आरोप है कि लेखपाल ने एक महिला से सांठगांठ कर उसे मृत दिखाकर उसकी जमीन उस महिला के नाम वरासत कर दी। किसान ने डीएम कानपुर व एसडीएम बिल्हौर से शिकायत कर लेखपाल, कानूनगो व महिला के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किसान का कहना है कि पिछले कई दिनों से ऑफिस ऑफिस के चक्कर काट रहे लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। किसान ने आरोप लगाते हुए कहा कि लेखपाल ने रुपयों के चक्कर में मृत दिखाकर एक दूसरी महिला के नाम वरासत कर दी।
कन्नौज के बसुइया गांव के पीड़ित शिवप्रकाश कटियार ने शिकायत में आरोप लगाया कि उसकी बिल्हौर के सिहुरादाराशिकोह गांव में ननिहाल है। जहां, उसकी मां को करीब चार बीघा कृषि भूमि मिली थी। मां की मृत्यु के बाद जमीन उसके नाम आ गई। आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने गांव की कल्पना देवी व उसके परिजनों से सांठगांठ कर पीड़ित की 26 जुलाई 2016 में मृत्यु दिखाकर 24 सितंबर 2021 को किसान शिवप्रकाश का नाम पृथक कर वरासत में गांव की कल्पना देवी का नाम वरासत में दर्ज कर दिया। बीते सप्ताह उसने तहसील आकर अपनी खतौनी निकलवाई। तो खतौनी से अपना नाम कटा देख वह गश खाकर गिर पड़ा। और लेखपाल से बात की। हालांकि लेखपाल ने 1 अप्रैल को उस वरासत को निरस्त कर दिया है।
नायब तहसील दार करेंगे अब जांच
मामला जब तहसील से डीएम ऑफिस तक पहुंचा तब अधिकारा सक्रिय हुए। एसडीएम रामानु के निर्देश पर अब जांच नायब तहसीलदार को सौंपी गई है। वहीं, एसडीएम का कहना है कि जांच बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक जांच के आधार पर अभी महिला के नाम की गई वरासत निरस्त कर दी गई है।
क्या कहते हैं लेखपाल साहब
लेखपाल प्रभात त्रिपाठी का कहना है कि महिला की जाति अलग है। और उसने वरासत आवेदन में गलत साक्ष्य प्रस्तुत कर वरासत कराई है। अधिकारियों के निर्देश पर महिला के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मैंने साक्ष्यों के आधार पर ही महिला के नाम पर वरासत की थी।