“हरियाणा पंजाब तो बेकार ही बदनाम है, आओ कभी उत्तर प्रदेश रंगबाजी क्या होती है हम तुम्हे बताते हैं, न गुंडई पर गाना बनाते हैं और न गाड़ी में जाट गुर्जर लिखवाते हैं, हमारे यहां पांच-पांच साल के लौंडे लौंडे कट्टा चलाते हैं।“ सोशल मीडिया पर ये डॉयलॉग जमकर चला। इसी पर वीडियो बनाने में एक महिला आरक्षी को नाप भी दिया गया। लेकिन आपकों बता दें कि ये डॉयलाग कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश की देसी कट्टे और तमंचों की कहानी को बयां करता है। कट्टा बनाकर एक हजार से लेकर 25 हजार तक में उपलब्ध कराते हैं। चोरी छुपे लोग कट्टा तैयार भी करा लेते हैं।