लखनऊ

अधिकारी खुद मानते हैं गन्दा है शहर-ए-लखनऊ, डॉक्यूमेंटेशन में काटे खुद अपने ही नंबर

म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन में निगम ने खुद काटे अपने 200 अंक
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Updated: 26 Feb 2018, 5:04 PM IST
lucknow nagar nigam
swachhta survekshan 2018

लखनऊ. इन्वेस्टर समिट के दौरान साफ़ और स्वच्छ दिखने वाला लखनऊ एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति पर पहुँच गया है। जल्द ही शहर को स्वछता के पैमाने पर आंका जाना है। इसके लिए होली बाद केंद्र की एक टीम राजधानी आएगी। उससे पहले नगर निगम ने अपनी कमियों को आंकने के लिए खुद ही रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के दौरान निगम अधिकारियों ने खुद माना है कि उनका शहर गंदा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुल 1400 अंकों में से शहर को अंक दिए गए हैं और इसमें करीब 200 अंकों को सीधे तौर से काटा गया है। ये वही म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन है जो निगम केंद्र से आयी टीम के सामने पेश करेगा।

कुछ ऐसा होगा डॉक्यूमेंटेशन
म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन, यानी निगम के द्वारा अपनी व्यवस्थाओं का ब्यौरा खुद देने के लिए 1400 अंक रखे गए हैं। इसमें निगम कितना डिजिटल हुआ है जैसे कर्मचारियों की बैयोमेट्रिक उपस्तिथि, मोबाइल कम्पेक्टर, कूड़ा ढोने वाले वाहनों में जीपीएस जैसी सुविधाओं, कूड़े का ट्रीटमेंट / सेग्रीगेशन, स्वच्छता अम्बेस्डर्स और स्कूल व होटलों का ब्योरा देना होगा। फिलहाल न ही सभी कूड़ा गाड़ियों में जीपीएस लगे हैं और न ही 17 हज़ार सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो सका है। हालाँकि बाज़ारों में ट्विन बिन और सुबह शाम सफाई व्यवस्था की सुविधा मुहैया कराइ जा रही है। स्कूलों और महोल्लों में स्वछता कमिटी का गठन अब तक नहीं हुआ है। 5 किसानों को भी पेश करना होगा जो निगम से कम्पोस्ट ले रहे हों। स्टाफ को स्वच्छता सम्बंधित कोर्सेस भी अटेंड करने थे जो नहीं हुए। ऐसे कई बिंदु है जिसपर निगम को खुद नंबर देने हैं और ख़ास बात ये है कि निगम अपनी नाकामियों को छुपा भी नहीं सकता क्यूंकि इस बार नेगिटिव मार्किंग भी की जानी है।

रैंक की दौड में मौजूदा स्थितियों को देखते हुए राजधानी का लड़खड़ाना लगभग तय है। यही कारण है कि निगम अधिकारी बार बार सेल्फ अस्सेस्मेंट को बदलने की बात कह रहे हैं। पिछली बार की तरह ही राजधानी इस बार भी खुले में शौच मुक्त होने के अंक गंवाएगा। न ही मानकों के आधार पर सार्वजानिक शौचालय का निर्माण हो सका है और न ही प्रत्येक घर से कूड़ा इखट्टा होना शुरू हो सका है।

यहां कटेंगे नंबर

- खुले में शौच मुक्त बनाने में फेल,17 हज़ार शौचालय बनाने का लक्ष्य
- 40 प्रतिशत ही कूड़ा कलेक्शन
- कूड़े का सेग्रीगेशन नहीं
- आवारा पशुओं से छुटकारा नहीं
- सीवेज ट्रीटमेंट
- कैपेसिटी बिल्डिंग (स्किल एनहैंसमेंट)

पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने कहा कि डॉक्यूमेंटेशन अभी पूरा नहीं हुआ है। कई राउंड में देखा जा रहा है कि लखनऊ को कितने अधिक मिल सकते हैं। कुल कितना स्कोर है अभी ये सार्वजानिक नहीं किया जा सकता।

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