लखनऊ

प्राइवेट स्कूलों का गोरखधंधा, कॉपी किताब के नाम पर लूट का खेल

Private Schools: उत्तर प्रदेश के पब्लिक स्कूलों में कॉपी किताबों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। बाजार से अधिक दामों में लूच मचा रखी है।
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Jul 08, 2022
 Loot in the name of copy books in Private Schools
Loot in the name of copy books in Private Schools

अप्रैल में शैक्षिक सत्र की शुरुआत होने के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी शुरु हो गई थी। स्कूल धड़ल्ले से कापी किताबों की बिक्री के साथ ही फीस भी बढ़ा चुके हैं। अफसरों ने निजी स्कूलों के दुकान बनने पर कार्रवाई की घुड़की दी थी, लेकिन न कोई जांच हुई और न कार्रवाई। इससे जुलाई शुरु होते ही स्कूलों में फिर से सामग्री बेचने का काम जारी है।

1 अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरु होने के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी भी शुरु हो गई थी। शासन ने 10 फीसदी से अधिक फीस न बढ़ाने का निर्देश जारी किया था, लेकिन स्कूलों ने अपनी सुविधा और दो सालों के कोरोना काल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मनमानी फीस बढ़ा दी। इसके साथ ही निजी स्कूल कापी किताबों के साथ यूनीफार्म, टाई बेल्ट तक स्कूलों से ही बेच रहे हैं। कुछ स्कूल जांच की लपेट में न आ जाएं इसके लिए दुकान सेट किए हैं, एक दुकान के अलावा उनके स्कूल में चलने वाली किताबें दूसरी किसी दुकान में नहीं मिलतीं हैं।

सरकार भले ही नई शिक्षा नीति से तमाम परिवर्तन का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन इन स्कूलों की निगरानी का कोई तंत्र नहीं है। कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता होने के बावजूद यहां पर अवैध रुप से पीजी, एलकेजी व यूकेजी की कक्षाएं संचालित होतीं हैं। इनके जरिए भी इन स्कूलों की बड़ी कमाई होती है।

अभिभावकों का कहना है कि बड़ी संख्या में स्कूलों ने बेसिक शिक्षा परिषद से कक्षा 8 तक की मान्यता ले रखी है। इसमें हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम दोनों की मान्यता है। मान्यता के साथ ही परिषद की ओर से पाठ्यक्रम और पुस्तकें भी निर्धारित हैं, लेकिन स्कूल संचालक खुद अपना सिलेबस तय करके अपनी सुविधा के अनुसार प्रकाशकों से पुस्तकें छपवाकर उनकी मनमानी कीमत निर्धारित करके उससे बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं।

इन स्कूलों में भी पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता के कोई मानक तय नहीं है। यहां कम शैक्षिक योग्यता वाले अप्रशिक्षित युवक-युवतियों को शिक्षण कार्य में लगाया जाता है। इससे इस तरह के शिक्षकों को कम वेतन देकर अधिक मुनाफा कमा लेते हैं। इस कारण इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

Updated on:
08 Jul 2022 12:39 pm
Published on:
08 Jul 2022 12:38 pm
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