
लखनऊ अग्निकांड मामले में बिल्डिंग मालिक सहित 3 गिरफ्तार(फोटो-ANI)
Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुई भीषण आग की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। एक तिमंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग इतनी भयावह थी कि 15 लोगों की जान चली गई। कई लोग आग की लपटों में झुलस गए, जबकि कुछ की मौत दम घुटने से हुई। इस दर्दनाक हादसे के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के बाद अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले में सख्त कदम उठाए। इस अग्निकांड में इमारत के मालिक समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है। साथ ही 4 प्रशासनिक अधिकारीयों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
अलीगंज थाने में दर्ज मुकदमे के मुताबिक, जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय और तूशॉक कृष्णा जायसवाल शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि 22 जून को हुई आग की इस घटना में इन तीनों की भूमिका को देखते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनके अलावा तीन अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
इस हादसे के बाद सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऊर्जा विभाग और फायर विभाग के अधिकारियों पर गाज गिरी है। जानकीपुरम के एक्सईएन कनेक्शन गौरव कुमार और इंदिरानगर में तैनात फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। कमलेन्द्र कुमार सिंह उसी फायर स्टेशन के प्रभारी थे, जिसके अधिकार क्षेत्र में यह घटना हुई। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के दो जूनियर इंजीनियर, अनिल कुमार और प्रमोद पांडेय को भी सस्पेंड किया गया है। माना जा रहा है कि इमारत के निर्माण, नक्शे और नियमों के पालन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है।
हादसे के बाद एलडीए ने भी अपनी तरफ से आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इसके लिए एक समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा करेंगे। समिति में मुख्य नगर नियोजक केके गौतम, मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता मनोज सागर और प्रभारी अधिकारी रवि नंदन सिंह को सदस्य बनाया गया है। यह समिति कई अहम बिंदुओं की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि इमारत का नक्शा किस आधार पर पास हुआ, क्या निर्माण तय मानचित्र के मुताबिक हुआ था या नहीं, कहीं नियमों को दरकिनार तो नहीं किया गया, और भवन में बिजली के लोड से जुड़ी क्या स्थिति थी।
Updated on:
23 Jun 2026 12:12 am
Published on:
22 Jun 2026 11:47 pm
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