
Sonam Wangchuk 2nd Independence Movement :सोनम वांगचुक का ‘दूसरी आजादी’ का आह्वान, 2047 से पहले राजनीतिक व्यवस्था बदलने की मांग (फोटो सोर्स:@Wangchuk66)
Sonam Wangchuk 2nd Independence Movement: भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ते हुए वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन का आह्वान किया है। उनका जोर किसी राजनीतिक दल या सत्ता परिवर्तन पर नहीं, बल्कि देश के नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर है। वांगचुक चाहते हैं कि ईमानदार, निडर और जनहित को प्राथमिकता देने वाले लोगों को राजनीति में आगे लाने के लिए देशभर में गंभीर संवाद शुरू हो।
लद्दाख से जुड़े वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत में एक शांतिपूर्ण राजनीतिक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इसे ‘India’s 2nd Independence movement’ यानी भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन बताया।
वांगचुक के मुताबिक, अगर भारत को 2047 में एक सम्मानित और मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा होना है तो केवल विकास के आंकड़े पर्याप्त नहीं होंगे। देश की राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व चुनने के तरीके पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।
वांगचुक ने राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की चर्चा को सीधे चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो निस्वार्थ, निडर और चरित्रवान हो।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र और पूरे भारत से ऐसे कम से कम एक व्यक्ति का नाम सुझाएं, जिसे वे सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व करने योग्य मानते हों।
वांगचुक की चिंता का एक प्रमुख आधार निर्वाचित प्रतिनिधियों की आपराधिक पृष्ठभूमि भी है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के 2024 लोकसभा चुनाव के विश्लेषण के अनुसार, 543 नवनिर्वाचित सांसदों में से 251 यानी 46 फीसदी ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 170 सांसदों यानी करीब 31 फीसदी ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मामले शामिल हैं।
वांगचुक का कहना है कि राजनीति में आपराधिक मामलों से जुड़ी ऐसी तस्वीर समाज में विश्वास की कमी को बढ़ा सकती है। इसी वजह से वह केवल राजनीतिक दलों की भूमिका पर निर्भर रहने के बजाय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की बात कर रहे हैं।
उनका सवाल मूल रूप से यह है कि क्या आम नागरिक ऐसे वैकल्पिक नेतृत्व की पहचान करने में भूमिका निभा सकते हैं, जो राजनीति को सेवा के माध्यम के रूप में देखता हो?
वांगचुक ने लोगों से कहा कि वे अपने क्षेत्र से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का सुझाव दें, जिसमें उन्हें ईमानदारी, साहस और सार्वजनिक जीवन के लिए जरूरी चरित्र दिखाई देता हो।
यह अपील इसलिए भी अहम है क्योंकि वांगचुक खुद मानते हैं कि पूरे देश में ऐसे लोगों की पहचान करना आसान नहीं है। उनका कहना है कि इस काम में जनता की मदद जरूरी होगी।
भारत 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। इस समय तक देश को विकसित और मजबूत राष्ट्र बनाने की चर्चा लगातार राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर होती रही है।
वांगचुक की पहल इसी भविष्य की तस्वीर में राजनीतिक सुधार का सवाल जोड़ती है। उनका तर्क है कि मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं और नेतृत्व की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए दूसरी आजादी का उनका विचार राजनीतिक सत्ता बदलने के बजाय राजनीतिक संस्कृति और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया में सुधार की दिशा में बहस खड़ी करता है।
सोनम वांगचुक का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन वाला आह्वान आने वाले दिनों में सिर्फ एक बयान रहेगा या देश में राजनीतिक सुधार पर व्यापक नागरिक बहस की शुरुआत करेगा यह देखना अहम होगा।
Updated on:
14 Aug 2026 07:42 am
Published on:
14 Aug 2026 07:32 am
