जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की “गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा” को लखनऊ में प्रशासन ने शर्तों के साथ अनुमति दी है। 11 मार्च को कांशीराम स्मृति स्थल पर सभा होगी।
Lucknow Swami Avimukteshwaranand: जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की प्रस्तावित सभा को लेकर लखनऊ प्रशासन ने शर्तों के साथ अनुमति प्रदान कर दी है। “गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा” के नाम से आयोजित यह कार्यक्रम 11 मार्च को राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित किया जाएगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, यातायात और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं।
बताया जा रहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 10 मार्च को देर शाम तक लखनऊ पहुंचेंगे। इसके बाद 11 मार्च को आयोजित होने वाली महासभा में वह “गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” का शंखनाद करेंगे और गौ संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस अभियान की शुरुआत वाराणसी से की थी। उन्होंने अपनी पदयात्रा को “धर्मयुद्ध” का नाम दिया है। इस यात्रा का उद्देश्य गौ माता को “राष्ट्रमाता” या “राज्यमाता” का दर्जा दिलाने, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और देशभर में गौ संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाने की मांग उठाना है। 7 मार्च को काशी से शुरू हुई यह पदयात्रा कई जिलों से होकर गुजरते हुए राजधानी लखनऊ पहुंच रही है। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में संत, साधु और श्रद्धालु भी उनके साथ जुड़े हुए हैं।
शंकराचार्य की यह पदयात्रा वाराणसी से शुरू होकर जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली और उन्नाव जैसे जिलों से होकर गुजरी है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर संत समाज और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और गौ संरक्षण के मुद्दे पर समर्थन जताया। यात्रा के दौरान जगह-जगह सभाएं और संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें गौ रक्षा और सनातन परंपराओं के संरक्षण पर चर्चा की गई।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस अभियान की शुरुआत से पहले उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि गौ संरक्षण से जुड़ी उनकी मांगों पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो वह व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे। इसी क्रम में उन्होंने वाराणसी से लखनऊ तक की पदयात्रा शुरू की, जिसे उन्होंने “गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” का नाम दिया है।
लखनऊ पहुंचने के बाद 11 मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर “गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संतों, गौ भक्तों और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सभा के दौरान गौ संरक्षण को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाने और सरकार को ज्ञापन सौंपे जाने की भी योजना है। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में गौ रक्षा को लेकर एक बड़े आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।
लखनऊ प्रशासन ने इस कार्यक्रम की अनुमति देते हुए कई सख्त नियम और शर्तें लागू की हैं। अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन द्वारा लगाई गई प्रमुख शर्तों में शामिल हैं-
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो कार्यक्रम की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा कार्यक्रम में तैनात पुलिस बल का खर्च भी आयोजकों द्वारा वहन किया जाएगा।
प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण और यातायात नियमों के पालन को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए हैं। शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या तेज संगीत बजाने पर प्रतिबंध रहेगा। ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि इन नियमों का उल्लंघन किया गया तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस महासभा को लेकर संत समाज और गौ भक्तों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित होना चाहिए और सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा।
लखनऊ प्रशासन और पुलिस विभाग इस कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। प्रशासन ने आयोजकों से भी सहयोग की अपील की है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
11 मार्च को होने वाली इस महासभा में गौ संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया जाएगा। संत समाज का मानना है कि गौ माता भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार और समाज दोनों का ध्यान गौ रक्षा के मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा। लखनऊ में होने वाली यह महासभा धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यक्रम के दौरान संत समाज क्या संदेश देता है और सरकार के सामने कौन-कौन सी मांगें रखी जाती हैं।