लखनऊ

Constable Akhilesh Tripathi: एक ही नाम की गलती से 166 दिन जेल में रहा सिपाही, 28 साल पहले मर चुके आरोपी की जगह हुई गिरफ्तारी

Constable Akhilesh Tripathi: राजस्थान पुलिस ने 1998 के मामले में लखनऊ के सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को गलत पहचान के चलते गिरफ्तार कर लिया। 28 साल पहले मर चुके आरोपी के नाम पर सिपाही ने 166 दिन जेल में बिताए।
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Aug 13, 2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर (gemini AI Image).

Lucknow constable: राजस्थान के सवाई माधोपुर से एक मामला सामने आया है, जहां सिर्फ नाम एक होने की वजह से लखनऊ में तैनात सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को 166 दिन जेल में बिताने पड़े। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ करीब 28 साल पहले गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, उसकी 1998 में ही मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद पहचान की सही तस्दीक किए बिना पुलिस ने लखनऊ के रहने वाले सिपाही अखिलेश त्रिपाठी को उसी आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लिया।

घर से निकलते ही अचानक पहुंची राजस्थान पुलिस

मामला 15 फरवरी 2026 का है। मूल रूप से अंबेडकरनगर के रहने वाले और लखनऊ में पुलिसकर्मी के तौर पर तैनात अखिलेश त्रिपाठी गोमतीनगर के ग्वारी गांव में अपने दो बेटों के साथ बाहर निकले थे। इसी दौरान एक एसयूवी उनके पास आकर रुकी और उसमें सवार लोगों ने उन्हें पकड़कर गाड़ी में बैठा लिया।

घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास के लोगों को भी कुछ समझ नहीं आया। बाद में परिवार की सूचना पर गोमतीनगर पुलिस सक्रिय हुई। शुरुआती तौर पर स्थानीय पुलिस को मामला अपहरण का लगा। सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई और गाड़ी की तलाश शुरू हुई। कुछ समय बाद पता चला कि अखिलेश को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

1998 के केस का वारंट, लेकिन आरोपी कोई और था

राजस्थान पुलिस के मुताबिक, सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी थाने में वर्ष 1998 के एक धोखाधड़ी के मामले में अखिलेश त्रिपाठी नाम के व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी। इसी मामले में उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी था और उस पर इनाम भी घोषित बताया गया था। राजस्थान पुलिस ने तकनीकी जानकारी के आधार पर लखनऊ में रहने वाले सिपाही अखिलेश त्रिपाठी तक पहुंच बनाई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सिपाही ने मौके पर ही पुलिस को बताया कि पहचान में गलती हुई है और उनका इस पुराने मामले से कोई संबंध नहीं है। लेकिन उनकी बात पर भरोसा नहीं किया गया और उन्हें राजस्थान ले जाया गया।

जिस आरोपी को तलाश रही थी पुलिस, उसकी 1998 में ही मौत हो गई थी

मामले की सबसे बड़ी चूक यहीं सामने आती है। जिस अखिलेश त्रिपाठी के खिलाफ पुराना मामला दर्ज था, वह लखनऊ के अलीगंज इलाके में रहता था और मूल रूप से देवरिया का निवासी बताया गया था। उसके नाम से एक फर्म भी पंजीकृत थी, जिसके जरिए धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक उस व्यक्ति की 17 सितंबर 1998 को ही मौत हो चुकी थी। यानी जिस आरोपी को लेकर पुलिस करीब ढाई दशक बाद तलाश कर रही थी, वह गिरफ्तारी के समय जीवित ही नहीं था।

पिता का नाम भी अलग था, फिर भी नहीं हुई पहचान की पुष्टि

मामले में एक और अहम सवाल पहचान को लेकर उठता है। गिरफ्तारी वारंट में आरोपी के पिता का नाम विश्वनाथ दर्ज बताया गया था, जबकि गिरफ्तार किए गए सिपाही के पिता का नाम अलग था। इसके बावजूद पुलिस ने पहचान की पर्याप्त पुष्टि किए बिना कार्रवाई कर दी। अदालत में भी सिपाही की ओर से यही दलील दी गई कि वारंट में दर्ज व्यक्ति और वह खुद अलग-अलग हैं। बाद में पुलिस की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि सही पहचान की पुष्टि नहीं होने के कारण गिरफ्तारी हुई।

हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर जताई नाराजगी

मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी वारंट और सिपाही के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं था। अदालत ने पुलिस को भविष्य में ऐसी कार्रवाई करते समय पहचान की पर्याप्त जांच-पड़ताल करने की जरूरत बताई। इसके बाद संबंधित अदालत के स्तर पर सिपाही की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

166 दिन बाद मिली जेल से आजादी

गलत पहचान के चलते गिरफ्तार किए गए अखिलेश त्रिपाठी को 1 अगस्त 2026 को जेल से रिहा किया गया। यानी उन्हें करीब 166 दिन जेल में गुजारने पड़े। एक पुलिसकर्मी, जिसकी जिम्मेदारी कानून लागू कराने की है, उसे ही अपनी पहचान साबित करने के लिए इतने लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

जेल से बाहर आए, लेकिन नौकरी का संकट बरकरार

जेल से रिहाई के बाद अखिलेश लखनऊ लौट आए हैं। हालांकि उनकी परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। बताया जा रहा है कि वह अपनी ड्यूटी पर दोबारा ज्वाइन करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी ज्वाइनिंग नहीं हो सकी है। वह अधिकारियों से भी मुलाकात कर चुके हैं और हाईकोर्ट के आदेश से जुड़े दस्तावेज उनके पास हैं। इसके बावजूद नौकरी पर वापसी नहीं होने से उनके सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।

Updated on:
13 Aug 2026 05:34 pm
Published on:
13 Aug 2026 05:34 pm