लखनऊ के केजीएमयू शताब्दी अस्पताल में 21 वर्षीय कैंसर पीड़ित युवती ने तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह गंभीर मानसिक तनाव में थी और इलाज के लिए पिता के साथ अस्पताल में भर्ती थी। डॉक्टरों के अनुसार, बीमारी के बढ़ते दर्द और डिप्रेशन के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
Lucknow Shatabdi Hospital Suicide: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के शताब्दी अस्पताल में सोमवार को 21 वर्षीय युवती ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। युवती मलाशय (बड़ी आंत) के कैंसर से पीड़ित थी और पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक कैंसर उसके शरीर में फैल चुका था, जिसके चलते उसे कीमोथेरेपी दी जा रही थी।
रविवार की रात दीपमाला अपने पिता रजनीश के साथ केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के कॉरिडोर में सोई थी। रात करीब 3 बजे पिता की अचानक आंख खुली तो बेटी बिस्तर पर नहीं थी। उन्होंने पूरे अस्पताल में उसे तलाशना शुरू किया, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। कई घंटे की खोज के बाद, सोमवार सुबह करीब 6 बजे सूचना मिली कि अस्पताल के बाहर एक युवती का शव मिला है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने बताया कि दीपमाला को कैंसर की उन्नत अवस्था (एडवांस स्टेज) थी और उसे सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी जा रही थी। "युवती के शरीर में कैंसर काफी फैल चुका था और वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। परिवार के अनुसार, बीमारी के कारण वह डिप्रेशन में थी। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर मरीजों के इलाज के दौरान उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। कई बार मरीजों को डिप्रेशन और चिंता की समस्या होती है, जो उनकी मानसिक स्थिति को खराब कर सकती है। डॉ. अंजलि वर्मा (मनोचिकित्सक, केजीएमयू) ने कहा, "कैंसर पीड़ितों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी काउंसलिंग और थेरेपी मिलनी चाहिए। अगर किसी मरीज में डिप्रेशन के लक्षण दिखते हैं, तो परिवार को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।"
दीपमाला की आत्महत्या से एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या सामने आई है। कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ रहे मरीजों को केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
मलाशय कैंसर जिसे कोलन कैंसर भी कहा जाता है, तब होता है जब कोलन या मलाशय की परत में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर आमतौर पर कोलन में मौजूद पॉलीप्स से विकसित होता है, जो समय के साथ घातक रूप ले सकते हैं।
इसके लक्षणों में लगातार कब्ज़, दर्दनाक पेट में ऐंठन, सूजन, मतली और उल्टी शामिल हैं। कुछ मामलों में मल में खून आ सकता है, और वजन में अचानक गिरावट हो सकती है।