लापरवाही में अर्जन अनुभाग टॉप पर है तो प्रवर्तन अनुभाग व संपत्ति अनुभाग दूसरे व तीसरे नंबर पर हैं।
लखनऊ. हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिकाओं व वादों को गंभीरता से न लेने पर एलडीए पर अवमानना की कार्रवाई हो रही है। लापरवाही में अर्जन अनुभाग टॉप पर है तो प्रवर्तन अनुभाग व संपत्ति अनुभाग दूसरे व तीसरे नंबर पर हैं। इनमें न तो याचिकाओं की पैरवी समुचित ढंग से की जाती है और न ही प्रति शपथ पत्र दाखिल किया जाता है। उच्च न्यायालय में दाखिल एक रिट याचिका में विगत 9 वर्षों से प्रतिशपथ पत्र नहीं दाखिल किया गया। इस कारण एलडीए के सचिव को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश पारित किया गया था। 12 जनवरी को सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ा। कोर्ट ने प्रति शपथ दाखिल न किए जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। इससे नाराज सचिव एमपी सिंह ने भी संबंधित अफसरों पर अंसतोष व्यक्त किया। अब संयुक्त सचिव विश्व भूषण मिश्र ने समस्त विभागाध्यक्ष से दस दिन में रिपोर्ट तलब की है।
एलडीए में उच्च न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिकाओं अथवा वादों की समीक्षा की गई। इस दौरान सामने आया कि याचिकाओं में लंबे समय के बाद भी संबधिंत विभाग व अनुभाग ने आख्या नहीं उपलब्ध कराई। इससे न्यायालय में प्रति शपथ पत्र न दाखिल होने से एलडीए के विपरीत आदेश पारित हो रहे हैं। इस प्रकार की लापरवाही में अर्जन, प्रवर्तन व प्रापर्टी अनुवभाग अव्वल है। विगत वर्षों में इन अनुभागों में याचिकाओं में अभी तक प्रतिशपथ पत्र दाखिल न किए जाने की संख्या अधिक है। जनहित याचिकाओं में न्यायालय से पारित आदेशों के अनुपालन में संबधिंत विभाग एक दूसरे अनुभाग पर कार्यों को टाल देते हैं। इसके अलावा याचिकाओं की पैरवी समुचित ढंग से नहीं की जाती है। इस संबंध में विभागाध्यक्ष के स्तर से भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
840 मामलों में प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं किए
इस लापरवाही में विशेष रूप से अर्जन विभाग पहले स्थान पर है। वर्ष 1981 से अब तक 772 मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं जिनमें से 286 रिट याचिकाओं में प्रति शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया है। 145 में प्रति शपथ पत्र दाखिल किया गया है जबकि 341 मामले निस्तारित हो चुके हैं। वहीं आरबीओ स्तर पर सबसे अधिक 1225 याचिकाओं में से 216 में प्रतिशपथ दाखिल नहीं किया गया है, 924 मामले निस्तारित हो चुके हैं। प्रापर्टी अनुभाग के 1213 मामलों में 123 में एफिडेविट फाइल नहीं किया गया। 943 मामलों को निस्तारित करा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट में 37 सालों में एलडीए के अलग अलग 17 विभागों पर 5596 मामले पंजीकृत हुए, इनमें से 840 में प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं किए। हालाँकि 4110 मामलों का निस्तारण हो चुका है। वहीं हाईकोर्ट क्रिमिनल कोर्ट में 382 मामले पंजीकृत हुए जिनमें से 50 में प्रतिशपथ दाखिल नहीं किए गए, 232 का निस्तारण हो चुका है।