Lucknow Petrol Price Hike: लखनऊ में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम एशिया युद्ध और कच्चे तेल की महंगाई से आम लोगों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
Lucknow Petrol Diesel Rate Hike: राजधानी लखनऊ समेत पूरे देश में शुक्रवार सुबह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार पेट्रोल के दाम में ₹3.14 प्रति लीटर और डीजल में ₹3.11 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसके बाद लखनऊ में पेट्रोल की कीमत करीब ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों की जेब पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भारतीय रुपये की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हैं। इस फैसले का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, सब्जियों, खाद्य पदार्थों, किराया और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी दिखाई देगा।
तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरें शुक्रवार सुबह छह बजे से लागू कर दी गईं। दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई कीमतों की जानकारी पेट्रोल पंप संचालकों को देर रात ई-मेल के जरिए भेजी गई। इसके बाद सुबह छह बजे से नए रेट लागू कर दिए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं।
1. पश्चिम एशिया में युद्ध
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
बीते कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के बावजूद लंबे समय से घरेलू दरें स्थिर रखी गई थीं, लेकिन अब नुकसान बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था।
3. रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट आने से तेल आयात महंगा हो जाता है। क्योंकि भारत कच्चा तेल डॉलर में खरीदता है, इसलिए रुपये की कमजोरी का सीधा असर ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक तेल कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने के कारण रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ेगा। बाइक और कार चलाना होगा महंगा।यदि कोई व्यक्ति रोजाना 5 लीटर पेट्रोल का उपयोग करता है, तो उसे महीने में लगभग 450 से 500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। कार मालिकों के लिए यह खर्च और अधिक बढ़ जाएगा।
डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ता है। बस, ट्रक, टैक्सी और ऑटो चालकों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर किराए पर देखने को मिल सकता है। ट्रांसपोर्टर संगठनों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो मालभाड़ा बढ़ाना पड़ेगा।
ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता। सब्जियां, फल, दूध और अन्य जरूरी सामान ट्रकों के जरिए शहरों तक पहुंचते हैं। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर बाजार कीमतों पर दिख सकता है। आने वाले दिनों में महंगाई दर पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की चिंता भी बढ़ गई है। डिलीवरी, माल ढुलाई और बाजार आने-जाने की लागत बढ़ने से छोटे कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। ई-कॉमर्स, ऑनलाइन डिलीवरी और लोकल सप्लाई से जुड़े व्यवसायों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी फैलने लगी थीं। इसी बीच सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने दैनिक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि नागरिक केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
| ईंधन | पुरानी कीमत | बढ़ोतरी | नई कीमत |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹94.63 प्रति लीटर | ₹3.14 | ₹97.77 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹87.56 प्रति लीटर | ₹3.11 | ₹90.67 प्रति लीटर |
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है, तो कीमतों में राहत भी मिल सकती है।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि पहले से महंगाई झेल रही जनता पर यह अतिरिक्त बोझ डालना गलत है। वहीं सरकार का पक्ष है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते यह फैसला मजबूरी में लिया गया है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतें किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डालती हैं। यदि लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहती हैं तो इसका असर परिवहन, उत्पादन और उपभोक्ता खर्च पर दिखाई देता है। इससे महंगाई दर बढ़ सकती है और बाजार में मांग भी प्रभावित हो सकती है।
लखनऊ में पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लोग नई कीमतों को लेकर चर्चा करते नजर आए। कई वाहन चालकों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी हो सकती है।