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UP Expressway News: यूपी के 4 बड़े लिंक एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट अटके, योगी सरकार अलर्ट

Jewar Link Expressway: उत्तर प्रदेश की चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण की धीमी रफ्तार से अटकी हुई हैं। योगी सरकार ने मॉनिटरिंग तेज कर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 15, 2026

जेवर, फर्रुखाबाद, झांसी और आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे परियोजनाओं को जल्द शुरू कराने की तैयारी     (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group) 

जेवर, फर्रुखाबाद, झांसी और आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे परियोजनाओं को जल्द शुरू कराने की तैयारी     (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group) 

Uttar Pradesh Expressway 2026: उत्तर प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में काम कर रही योगी सरकार की चार महत्वाकांक्षी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाएं फिलहाल भूमि अधिग्रहण की धीमी गति के कारण अटकती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मई माह में ही भूमि अधिग्रहण पूरा करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अभी तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।

उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है। कई परियोजनाओं में अब तक 25 प्रतिशत से भी कम भूमि अधिग्रहित हो पाई है, जबकि झांसी लिंक एक्सप्रेस वे में तो अभी तक शून्य प्रगति दर्ज की गई है।

इन परियोजनाओं को जल्द जमीन पर उतारने के लिए अब स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने सीधे निगरानी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए, ताकि प्रदेश का एक्सप्रेस वे नेटवर्क और मजबूत हो सके।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए थे सख्त निर्देश

दो मई को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि चारों लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का काम मई महीने में ही पूरा कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अधिग्रहण की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। सोमवार तक उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार चारों परियोजनाओं के लिए कुल 3678 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, लेकिन अब तक केवल 491 हेक्टेयर भूमि ही अधिग्रहित हो सकी है।

आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे की सबसे खराब स्थिति

चारों परियोजनाओं में सबसे धीमी प्रगति आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे में देखने को मिल रही है। करीब 70 किलोमीटर लंबे इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कुल 542 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, लेकिन अब तक केवल लगभग 5 हेक्टेयर भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है। प्रतिशत के हिसाब से यह प्रगति केवल 0.95 प्रतिशत है।

यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके बन जाने के बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे आपस में सीधे जुड़ जाएंगे। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश से पश्चिमी यूपी तक की यात्रा और अधिक आसान और तेज हो जाएगी। सूत्रों का मानना है कि यह लिंक बनने के बाद व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा फायदा मिलेगा।

झांसी लिंक एक्सप्रेस वे में अब तक शून्य प्रगति

करीब 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेस वे की स्थिति और भी चिंताजनक है। इस परियोजना के लिए कुल 1183 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन अभी तक एक भी हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित नहीं की जा सकी है। यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से उरई (जालौन) के पास शुरू होकर झांसी जिले की गरौठा, टहरौली, मोंठ और सदर तहसीलों से होकर गुजरेगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिहाज से यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है। इस एक्सप्रेस वे के जरिए झांसी और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे उद्योग, व्यापार और पर्यटन को गति मिलने की उम्मीद है।

जेवर लिंक एक्सप्रेस वे से एयरपोर्ट कनेक्टिविटी होगी मजबूत

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा है। करीब 80 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे बुलंदशहर के बन्नीपुर के पास गंगा एक्सप्रेस वे से शुरू होकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक जाएगा। इस परियोजना के लिए कुल 837 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसमें से अब तक लगभग 205 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। यानी करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यह एक्सप्रेसवे बनने के बाद गंगा एक्सप्रेस वे से सीधे जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस वे की भी धीमी चाल

करीब 92 किलोमीटर लंबे फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कुल 1116 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। अब तक लगभग 281 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। यह एक्सप्रेस वे इटावा के कुदरैल क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। यह परियोजना फर्रुखाबाद और आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी। इसके जरिए व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यात्रा समय में भी भारी कमी आएगी।

स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने संभाली कमान

भूमि अधिग्रहण की धीमी प्रगति को देखते हुए अब स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने इन परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि चारों लिंक एक्सप्रेस वे परियोजनाओं को जल्द शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का बजट जारी कर दिया गया है और संबंधित जिलाधिकारियों को तेजी से प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों के साथ संवाद बनाकर सहमति से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाए।

किसानों से बातचीत पर जोर

सरकार का फोकस इस बार किसानों से सीधे संवाद पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसानों की समस्याओं और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से सुलझाया जाए। अक्सर देखा गया है कि भूमि अधिग्रहण में मुआवजे को लेकर विवाद और कानूनी प्रक्रियाएं परियोजनाओं में देरी का कारण बनती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि किसानों को संतुष्ट कर तेजी से अधिग्रहण कार्य पूरा किया जाए।

यूपी का एक्सप्रेसवे मॉडल बना देश में उदाहरण

उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में एक्सप्रेस वे निर्माण के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। यमुना एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश की तस्वीर बदलने का काम किया है। सरकार का लक्ष्य अब इन बड़े एक्सप्रेसवे को आपस में लिंक कर पूरे प्रदेश में तेज और आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार करना है। सूत्रों के अनुसार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाएं पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे नेटवर्क वाला राज्य बन जाएगा।

व्यापार और उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा

चारों लिंक एक्सप्रेस वे परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन लागत कम होगी और यात्रा समय घटेगा। इससे औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।

परियोजनालंबाईकुल भूमि अधिग्रहणअब तक अधिग्रहित भूमि
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे80 किमी837 हेक्टेयर205 हेक्टेयर
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे92 किमी1116 हेक्टेयर281 हेक्टेयर
आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे70 किमी542 हेक्टेयर5 हेक्टेयर
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे115 किमी1183 हेक्टेयर0 हेक्टेयर