लखनऊ

निषाद पार्टी सुप्रीमो डॉ. संजय निषाद ने अपने खून से लिखा खत मांगा आरक्षण

- राष्ट्रपति,पीएम, सीएम से मछुआरों को एससी श्रेणी में आरक्षण देने की मांग की- निषाद पार्टी ने मंगलवार को धूमधाम से मनाई अपनी छठी स्थापना दिवस

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Aug 18, 2021
निषाद पार्टी सुप्रीमो डॉ. संजय निषाद ने अपने खून से लिखा खत मांगा आरक्षण

लखनऊ/गोरखपुर. निर्बल शोषित इंडिया हमारा आमदल (निषाद पार्टी) सुप्रीमो डॉ. संजय निषाद ने आरक्षण की मांग के लिए अपने खून से राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखा है। संजय निषाद ने कहाकि, वे भाजपा संग हैं। उन्‍हें पूरा विश्‍वास है कि भाजपा की सरकार उनके समाज के लोगों की मांग को सुनेगी। इस वजह से छठवीं वर्षगांठ पर वे और उनके समाज के लोग खून से खत लिखकर ये याद दिलाना चाहते हैं कि उन्‍होंने देश के लिए खून बहाया है। उन्‍हें उनका अधिकार मिलना चाहिए।

धूमधाम से मनाई छठवी वर्षगांठ :- मंगलवार को निर्बल शोषित इंडिया हमारा आमदल (निषाद पार्टी) की स्‍थापना की छठवी वर्षगांठ थी। डॉ. संजय निषाद ने पार्टी के पदाधिकारियों के साथ गोरखपुर के पादरी बाजार में भव्‍य कार्यक्रम का आयोजन किया।

मछुआ समाज उनका साथ दे :- अपने समाज के लोगों का आह्वान करते हुए डॉ. संजय निषाद ने कहाकि, वे इस लड़ाई में उनका साथ दें, वे उन्‍हें आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसके बाद संजय निषाद ने आरक्षण की मांग को दोहराते हुए परिवार के साथ अपने हाथ से खून निकालकर खत लिखा। संतकबीरनगर से बीजेपी सांसद और उनके पुत्र इंजीनियर प्रवीण निषाद ने भी केन्‍द्र सरकार के नाम खत लिखकर आरक्षण की मांग की।

तमाम पार्टियों ने सिर्फ वोट बैंक समझा :- डॉ. संजय निषाद ने कहाकि, आजादी के बाद भी हमारा मछुआ समाज आजाद विहिन है, भूखमरी, बेरोजगारी, शिक्षा के अधिकार से विहिन इस मछुआ समाज को आजादी नहीं मिली हैं। आजादी के इतने वर्षों तक देश और प्रदेश में राज भोगने वाली कांग्रेस-एसपी-बीएसपी समेत तमाम पार्टियों ने मछुआ समाज को केवल वोट बैंक समझा और चुनाव के बाद इनका अधिकारों को छीनने का काम किया। निषाद पार्टी का 16 अगस्त 2016 में जब गठन हुआ तब मझवार, गौड़, तुरैहा, खरवार, बेलदार, खरोट, कोली आदि जाति व उपजातियों को भारत के नागरिक होने के बाद भी इन्हें मिलने वाले 5 मौलिक अधिकार से भी वंचित रखा गया था।

चैन से बैठने वाले नहीं :- डॉ. संजय निषाद ने कहाकि, जब तक आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक चैन से बैठने वाले नहीं हैं। लोग यह न समझे कि हम सिर्फ आरक्षण कि ही लड़ाई लड़ रहे हैं। हम तब तक लड़ेंगे जब तक हमारे समाज के आखिरी व्यक्ति तक समानता के सभी अधिकार न पहुंचे।

Published on:
18 Aug 2021 10:04 am
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