लखनऊ

पंचायत चुनाव में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी को जनता ने दिया भरपूर प्यार : संजय सिंह

- आप का दावा, यूपी पंचायत चुनाव में 200 प्रत्याशी बने प्रधान- करीब 70 जिला पंचायत सदस्य सीट पर विजय
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Updated: 4 May 2021, 7:19 PM IST
पंचायत चुनाव में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी को जनता ने भरपूर प्यार : संजय सिंह
पंचायत चुनाव में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी को जनता ने भरपूर प्यार : संजय सिंह

लखनऊ. यूपी पंचायत चुनाव रिजल्ट 2021 (Panchayat Election Results) में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के चेहरे पर मुस्कान छा गई है। पंचायत चुनाव के घोषित रिजल्ट को देखकर आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके करीब 200 ग्राम प्रधान प्रत्याशी और 70 से अधिक जिला पंचायत सदस्य ने जीत दर्ज की है।

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहाकि, पहली बार पंचायत चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी को जनता ने भरपूर प्यार दिया है। पंचायत चुनाव परिणाम ने आगामी विधानसभा चुनाव में नए बदलाव के संकेत दिए हैं। आप ने अच्छा प्रदर्शन करने वाले सदस्यों को विधानसभा चुनाव में मौका देने का वादा एक बार फिर दोहराया है। इंतजार कीजिए, अभी पूरे परिणाम आने बाकी है।

यूपी में बढा रहा है पार्टी का परिवार :- यूपी में राजधानी लखनऊ सहित करीब सभी जिलों में आप उम्मीदवार विजयी हुए हैं। आम आदमी पार्टी के कई प्रत्याशी दूसरे, तीसरे स्थान पर रहे है। संजय सिंह ने कहाकि, यूपी में पार्टी का परिवार बढ़ना शुरू हो गया है। पार्टी का संगठन गांवों तक खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में पार्टी समर्थित क्षेत्र पंचायत सदस्य भी विजयी हुए हैं।

विधानसभा चुनाव का मॉकड्रिल है जिला पंचायत चुनाव :- संजय सिंह ने कहाकि, सत्ता में बैठे लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। शहर की पार्टी बताकर आम आदमी पार्टी को नकारने वालों को जनता ने खुद जवाब दे दिया है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर से लेकर प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, जौनपुर, बागपत, बरेली, मैनपुरी, लखीमपुर खीरी, महोबा आदि जिलों में पार्टी ने विधानसभा चुनाव का मॉकड्रिल माने जा रहे जिला पंचायत चुनाव में सफलता हासिल की है।

जीत का प्रमाणपत्र नहीं मिला :- प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार के दवाब में प्रशासन ने पार्टी के जीते उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र न देने का आरोप लगाया। मैनपुरी, बांदा, रायबरेली और पीलीभीत जैसे कई जिलों से शिकायतें आई हैं कि उन्हें प्रमाणपत्र नहीं मिले हैं।

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