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UP में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बल्क में भरे गए फॉर्म 7? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी रिपोर्ट; समझिए क्या है फॉर्म 7

Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बल्क में भरे गए फॉर्म 7 में कथित गड़बड़ियों की जांच के निर्देश चुनाव आयोग को दिए हैं। जानिए आखिर क्या है फॉर्म 7...
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लखनऊ

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Mohsina Bano

•

Updated: 30 Oct 2026, 6:29 PM IST

UP Voter List, Form 7, Special Intensive Revision, UP Government, Supreme Court, ECI

UP में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम निर्देश (PC: ANI)

Supreme Court on UP SIR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से इन आरोपों की जांच करने और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामला उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि, वे मतदाता सूची में सामने आई उन गड़बड़ियों की जानकारी चुनाव आयोग को लिखित नोट के रूप में दें, जिनका अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इसके बाद आयोग तथ्यों की जांच करेगा और जरूरत के मुताबिक सुधारात्मक कदम उठाकर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेगा।

क्या है फॉर्म 7, जिसके इस्तेमाल पर उठे सवाल?

आपको बता दें कि मतदाता सूची के ड्राफ्ट से किसी वोटर का नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का उपयोग किया जाता है। उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे फॉर्म जमा किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि, कुछ जगहों पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए सामूहिक रूप से फॉर्म जमा किए गए। एक याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दावा किया कि एक विधानसभा क्षेत्र में किसी खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए 32 फॉर्म जमा किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्या आदेश दिया?

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अनसुलझी गड़बड़ियों का पूरा विवरण देते हुए चुनाव आयोग को एक विस्तृत नोट सौंपें। अदालत ने कहा कि जो गड़बड़ियां अदालत के संज्ञान में लाई गई हैं उन्हें एक नोट के माध्यम से चुनाव आयोग के वरिष्ठ वकील को सौंपा जाए। इसके बाद चुनाव आयोग इसकी जांच करे सुधारात्मक कदम उठाए और अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे।

'चुनाव आयोग ने माना जमा हुए थे बल्क फॉर्म'

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने माना कि यूपी में थोक में आवेदन जमा किए गए थे लेकिन, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। नायडू ने अदालत को बताया कि हमने पाया कि फॉर्म 7 के थोक आवेदन जमा किए गए थे। हमारे अधिकारियों ने उनकी पूरी जांच की। वे आवेदन पूरी तरह से झूठे थे और हमने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

एक समुदाय को निशाना बनाने का आरोप

वहीं एक याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए एक ही निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में 32 फॉर्म जमा किए गए थे। इस गंभीर आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मामले की तुरंत जांच करने को कहा है। गौरतलब है कि अदालत कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें यूपी में चलाए जा रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तरीके को चुनौती दी गई है।