
Swine Flu Alert: राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू और फ्लू जैसे संक्रमण के मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की निगरानी लगातार जारी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने लोगों से स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पैनिक जैसी कोई स्थिति नहीं है। बुखार, खांसी, जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण होने पर लोग डरने के बजाय चिकित्सक से सलाह लें और जरूरत पड़ने पर जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अलग-अलग इलाकों में जाकर स्थिति की निगरानी कर रही हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ में सक्रिय स्वाइन फ्लू मामलों की संख्या बढ़ी है और सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने साफ किया है कि बुखार होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। यदि बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, जुकाम, शरीर में दर्द, कमजोरी या सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर होगा। सामान्य वायरल बुखार और स्वाइन फ्लू के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करना उचित नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं। हाल में स्वास्थ्य विभाग ने भी सामान्य सर्दी-जुकाम को लेकर अनावश्यक घबराहट से बचने और लक्षण गंभीर होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।
फ्लू जैसे संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल, हाथों की स्वच्छता और संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी जैसी सावधानियां उपयोगी हो सकती हैं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे दूसरों के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्री का संदेश यही है कि बीमारी को लेकर डरने के बजाय समय पर सावधानी और उपचार को प्राथमिकता दी जाए।
लखनऊ में स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में जांच और उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। हालिया स्वास्थ्य विभागीय अपडेट के अनुसार सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इसका फायदा यह है कि लक्षण वाले मरीज समय रहते अस्पताल पहुंचकर जांच करा सकते हैं।
ऐसे में बुखार या फ्लू जैसे लक्षण होने पर मरीजों को बिना जरूरत निजी जांच केंद्रों की ओर भागने के बजाय पहले नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार आगे की जांच और उपचार की दिशा तय करेंगे।
ब्रजेश पाठक ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इलाकों में जाकर निगरानी कर रही हैं। उद्देश्य यह है कि संभावित संक्रमण के मामलों की समय रहते पहचान की जा सके और मरीजों को जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाए। सरकारी अस्पतालों में भी फ्लू से संबंधित मरीजों की निगरानी बढ़ाई गई है। हाल के दिनों में लखनऊ के अस्पतालों में फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है, इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था को अतिरिक्त सतर्क रखा गया है।
स्वाइन फ्लू की निगरानी के साथ राजधानी में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। सिविल अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी की शुरुआत की गई है। इसके तहत अब मरीजों को न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और स्ट्रोक से जुड़ी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं अस्पताल में ही मिल सकेंगी। यह सुविधा लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और सिविल अस्पताल के बीच हुए समझौते के तहत शुरू की गई है। लोहिया के विशेषज्ञ चिकित्सक सिविल अस्पताल में आकर मरीजों को परामर्श और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के लिए हर बार बड़े चिकित्सा संस्थान का रुख नहीं करना पड़ेगा। सिविल अस्पताल में ही विशेषज्ञ परामर्श मिलने से मरीजों का समय और आने-जाने का खर्च बच सकता है। खासकर न्यूरोलॉजी, हृदय रोग और स्ट्रोक से जुड़े मरीजों के लिए समय पर विशेषज्ञ की सलाह बेहद महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होने से मरीजों की प्रारंभिक जांच, चिकित्सकीय सलाह और आगे के उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि सिविल अस्पताल में शुरू किए गए सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी मॉडल को दूसरे अस्पतालों में भी लागू किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के बीच समझौते किए जाएंगे। इस व्यवस्था के तहत मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं जिला स्तर के अस्पतालों तक पहुंचाने का प्रयास होगा। इसका उद्देश्य यह है कि गंभीर बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ इलाज के लिए बहुत दूर न जाना पड़े और जिला अस्पतालों में ही उन्हें बेहतर चिकित्सा परामर्श मिल सके।
चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 70 वर्ष तक के अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लेने का भी रास्ता खोला गया है। इससे लंबे अनुभव वाले डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अपनी विशेषज्ञता का लाभ दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि अनुभवी विशेषज्ञों के जुड़ने से अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। साथ ही युवा डॉक्टरों और चिकित्सा व्यवस्था को भी अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का लाभ मिल सकता है।
फ्लू जैसे सामान्य लक्षण होने पर भी यदि मरीज की स्थिति बिगड़ रही हो तो चिकित्सीय सलाह में देरी नहीं करनी चाहिए। सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल जाना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी वाले मरीजों में विशेष सावधानी की जरूरत होती है। स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा सलाह का मूल संदेश यही है कि हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से संपर्क करने और जरूरत पड़ने पर जांच कराने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामलों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। ऐसे में लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी के लिए डॉक्टर तथा स्वास्थ्य विभाग की सलाह को प्राथमिकता दें।
ब्रजेश पाठक ने भी लोगों से यही अपील की है कि स्वाइन फ्लू को लेकर पैनिक न करें, बल्कि मास्क, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा जांच जैसी सावधानियां अपनाएं। दूसरी ओर सिविल अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी और मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञों की सेवाएं जिला अस्पतालों तक पहुंचाने की योजना से राजधानी समेत प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।