लखनऊ

UP में मलिहाबादी, दशहरी आम के दामों में तेजी: डबल हो सकती है कीमत, जानिए क्या है वजह?

Mango Prices in Uttar Pradesh: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से उत्तर प्रदेश में प्रमुख आम उत्पादन (Mango Production) वाले क्षेत्रों में फसलों को बड़ा नुकसान (Crops Damage) हुआ है। ऐसी स्थिति में प्रसिद्ध मलिहाबादी और दशहरी आम (Malihabadi and Dussehri Mangoes) के दाम में तेजी आई है।
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May 25, 2026
Mango prices increased
यूपी में आम के दाम में तेजी (AI इमेज)

Mango Prices in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध मलिहाबादी और दशहरी आमों का स्वाद इस बार महंगा हो गया है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से उत्तर प्रदेश में प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में फसल पर बुरा असर हुआ है। फसल को नुकसान होने से किसानों का मुनाफा और उपज कम हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में 60 फीसदी तक नुकसान हुआ है। ऐसी स्थिति में आम के दामों में तेजी आई है।

80 से 120 रुपए तक बिक रहे आम

भारत के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश की करीब 25-28 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस बार मौसम की मार की वजह से किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसका असर आम की कीमतों पर पड़ा है। इस बार आम 80 से 120 रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं। मलिहाबाद के नबी नगर गांव के किसान कासिम रजा ने बताया कि इस साल केवल 40 प्रतिशत पेड़ों पर ही फल लगे हैं। उनके 20 बीघा के बाग में पहले विदेशों तक आम का निर्यात होता था। किसान का कहना है कि इस बार आम का निर्यात स्थानीय बाजारों तक सीमित रह जाएगा।

आंधी-बारिश ने बिगाड़ा किसानों का खेल

मुजासा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान और आम उत्पादक मोहम्मद मियान ने कहा कि बेमौसम बारिश और तूफान ने फूल आने की अवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। बाजार में मांग भले अधिक हो, लेकिन कई किसानों के पास लागत वसूलने लायक उपज नहीं है। इसी तरह मलिहाबाद के किसान रईस अहमद ने बताया कि इस वर्ष का उत्पादन पिछले साल का मुश्किल से 40 प्रतिशत ही है। पहले 30-50 रुपए प्रति किलो बिकने वाले दशहरी आम अब जून के पीक सीजन में 80 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं। किसानों का कहना है कि 1 जून के बाद प्राकृतिक रूप से पकने वाले आमों की मिठास और सुगंध बेजोड़ होगी, लेकिन मात्रा बेहद कम रहेगी।

वैज्ञानिक कारणों से भी फसलों को नुकसान

केंद्रीय उपोष्ण कटिबंधीय बागवानी संस्थान के चीफ वैज्ञानिक डॉ. एच.एस. सिंह के मुताबिक, फूल खिलने के चरम समय में घना कोहरा छा गया था। इसकी वजह से फूलों में नमी टपकने लगी। इसके कुछ दिन बाद अचानक बारिश शुरू हो गई। आम के फूलों पर पानी जहर की तरह काम करता है, जिससे बड़े पैमाने पर फूल झड़ गए और फल लगने की संख्या घट गई। किसान बताते हैं कि आम के बाग प्राकृतिक चक्र का पालन करते हैं। एक साल भारी फसल, दूसरे साल कम।

कुछ किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए केमिकल ग्रोथ रेगुलेटर (कल्टर) का उपयोग करते हैं, लेकिन यह लंबे समय में पेड़ों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। मलिहाबाद जैसे क्षेत्रों में कई बाग लगभग बंजर नजर आ रहे हैं। उत्पादन कम होने से किसानों की आय प्रभावित हो रही है, जबकि उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ेंगे। इस साल दशहरी आम का सीजन गुणवत्ता में अच्छा रहने की उम्मीद है, लेकिन मात्रा बेहद सीमित रहेगी।

Updated on:
25 May 2026 10:23 pm
Published on:
25 May 2026 07:40 pm