लखनऊ

बंगाल में ममता का इस्तीफा देने से इनकार: UP की सियात में बढ़ी तकरार, BJP और सपा के बीच सियासी संग्राम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम (West Bengal Assembly Election Results) आने के बाद ममता बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार (Mamata Banerjee Refuse to Resign) कर दिया है। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम से उत्तर प्रदेश की राजनीति (Uttar Pradesh Politics) गर्म हो गई है।

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May 06, 2026
बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर UP में सियासी तकरार (Photo- IANS)

West Bengal Election Results2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 का रिजल्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल में TMC अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार (Mamata Banerjee Resignation) कर दिया है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का कहना है कि वे चुनाव हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें हराया गया है। बंगाल के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नाताओं में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।

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सपा सांसद बोले- चुनाव नहीं, लोकतंत्र पर डकैती हुई

ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफे देने से इनकार करने पर अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने प्रतिक्रिया दी है। सपा सांसद ने कहा- ममता बनर्जी हारी नहीं हैं, हराई गई हैं। यह चुनाव और इससे पहले उत्तर प्रदेश में जो उपचुनाव हुआ था, वह चुनाव नहीं था। वह सीधे-सीधे लोकतंत्र पर डकैती थी। इतिहासकार लिखेंगे कि मर्यादापुर्षोत्तम राम की नगरी अयोध्या के मिल्कीपुर में लोकतंत्र की डकैती हुई है।

अवधेश प्रसाद ने आगे कहा कि यही काम (लोकतंत्र पर डकैती) पश्चिम बंगाल में हुआ है। उनके(ममता बनर्जी) साथ मतदाताओं की भारी भीड़, भारी बहुमत है। आज पूरे देश में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा छेड़े गए आंदोलन की जरूरत है। तभी इस देश में लोकतंत्र और संविधान बचेगा। अवधेश प्रसाद ने कहा- मुझे खुशी है कि इसी मकसद के साथ I.N.D.I.A गठबंधन बना है। मकसद बहुत बड़ा है, I.N.D.I.A गठबंधन और देशवासी ममता बनर्जी के साथ हैं।

बंगाल में ममता की हार-जीत का नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मुद्दा

संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया, केंद्रीय एजेंसियों और बीजेपी की रणनीति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बर्क ने कहा कि यह सिर्फ हार-जीत का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार पर चोट का मुद्दा है। बिहार चुनाव से लेकर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के वोटों को टारगेट कर काटा गया। लाखों मतदाता आज भी अपने वोट की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जियाउर्रहमान बर्क ने दावा किया कि TMC के समर्थकों का वोट ही खत्म कर दिया गया है।

शुभेंदु अधिकारी को जियाउर्रहमान बर्क की नसीहत

सपा सांसद ने केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि हमेशा यह भरोसा रहा कि केंद्रीय फोर्स निष्पक्ष रहेगी, लेकिन इस बार काफी हद तक बीजेपी के प्रति झुकाव जैसी स्थिति दिखी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सभी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता, लेकिन जो हुआ वह चिंता का विषय है। ममता बनर्जी को घेरकर हराने की कोशिश की गई, लेकिन ऐसी रणनीति ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सकती। शुभेंदु अधिकारी के बयान पर बर्क ने कहा कि अगर सिर्फ कहने से सब कुछ हो जाता तो फिर चुनाव की जरूरत ही नहीं पड़ती। पहले शुभेंदु अधिकारी खुद अपनी स्थिति मजबूत करें और मुख्यमंत्री बनने की लड़ाई लड़ें, फिर दूसरों पर टिप्पणी करें।

क्या बोले डिप्टी CM?

डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के ऐलान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' पर लिखा- सुश्री ममता बनर्जी की विधानसभा में करारी हार उनकी व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि अत्याचार, सिंडिकेट, घुसपैठियों के संरक्षण, तुष्टिकरण की राजनीति और भ्रष्टाचार की भी पराजय है।

जनता का संदेश साफ है कुर्सी खाली करो, उनकी पार्टी का इतिहास इतना काला है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार अब कभी नहीं बनेगी। लोकतंत्र का गला घोटकर पश्चिम बंगाल को लूटने की परत-दर-परत जांच होगी। एक भी भ्रष्टाचारी नहीं बचेगा, अपनी सम्मानजनक विदाई लेना ही ममता दीदी के पास एकमात्र रास्ता है।

बीजेपी नेता बोले- ममता बनर्जी ने लोकतंत्र का अपमान किया

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा- ममता बनर्जी अगर इस्तीफा नहीं देने की बात कह रही हैं तो यह बंगाल के जनादेश का अपमान है। एक तरफ 'INDI' गठबंधन लोकतंत्र की रक्षा बात करती था। उन्हें संविधान के अनुच्छेद 172 का ज्ञान होना चाहिए कि किसी भी राज्य के विधानसभा की जिस दिन पहली बैठक होगी, तब से 5 साल ही वह विधानसभा होगी। उसके बाद उसका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। यह संवैधानिक व्यवस्था है। न केवल इस तरह के बयान से वे (ममता बनर्जी) अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, बल्कि यह भी दर्शा रही हैं कि लोकतंत्र में उनकी कोई आस्था नहीं है।

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