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पंचायत चुनाव: फर्जी मतदाताओं को रोकने के लिए ‘धांसू प्लान’ तैयार! ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर क्या खबर?

Panchayat Chunav Update: पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मंत्री ओपी राजभर का कहना है कि ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

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लखनऊ

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Harshul Mehra

May 06, 2026

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पंचायत चुनाव से पहले बड़ी खबर! फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Panchayat Chunav Latest Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पंचायत चुनाव को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जहां आगामी पंचायत चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह (Raj Pratap Singh) ने जानकारी दी कि फर्जी वोटिंग रोकने के लिए चेहरा पहचान प्रणाली (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम) लागू किया जाएगा।

देश में पहली बार चुनाव में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का प्रयोग

यह तकनीक देश में पहली बार किसी चुनावी प्रक्रिया में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मतदाता एक से अधिक बार मतदान ना कर सके। अगर कोई व्यक्ति एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद दूसरे केंद्र पर मतदान की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उसे तुरंत पहचान लेगा।

शाहजहांपुर और कुशीनगर में सफल परीक्षण

इस तकनीक का सफल परीक्षण शाहजहांपुर (Shahjahanpur) के कटरा और कुशीनगर (Kushinagar) के फाजिलनगर में नगर पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव के दौरान किया गया। इन दोनों क्षेत्रों में कुल 50,257 मतदाताओं पर यह प्रयोग किया गया, जो सफल साबित हुआ।

मोबाइल ऐप के जरिए होगी पहचान

मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) ऐप इंस्टॉल किया गया है। मतदान शुरू होने से लेकर खत्म होने तक मोबाइल में केवल यही ऐप सक्रिय रहेगा। हर मतदाता की पहचान उसके स्टेट वोटर नंबर (SVN) के जरिए होगी। अंतिम चार अंक डालते ही उसकी फोटो और पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। इसके बाद मौके पर मतदाता की फोटो लेकर उसका मिलान किया जाएगा, जिससे डुप्लीकेट वोटिंग की संभावना खत्म हो जाएगी।

रियल टाइम मॉनिटरिंग और टेक्निकल निगरानी

पूरी प्रक्रिया की निगरानी राज्य निर्वाचन आयोग के कंट्रोल रूम से रियल टाइम में की जाएगी। यहां तक कि ऐप वाले मोबाइल की बैटरी पर भी ऑनलाइन नजर रखी जाएगी, ताकि मतदान प्रक्रिया बाधित न हो। इसके अलावा मतदान कर्मियों को मोबाइल डेटा के लिए अलग से 200 रुपये दिए जाएंगे।

नगर निकाय चुनाव में भी लागू होगी तकनीक

राज्य निर्वाचन आयोग की योजना है कि पंचायत चुनाव के बाद इसी तकनीक को नगर निकाय चुनावों में भी लागू किया जाए। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।

चुनाव में देरी पर बढ़ सकता है कार्यकाल

इसी बीच पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) पहले ही कह चुके हैं कि यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

अन्य राज्यों का दिया उदाहरण

राजभर ने कहा कि अगर चुनाव टलते हैं, तो मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। उन्होंने राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जा चुकी है।

आगे की रणनीति पर नजर

अब सबकी नजर इस बात पर है कि पंचायत चुनाव तय समय पर होते हैं या सरकार कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लेती है। वहीं, फेसियल रिकग्निशन जैसी तकनीक का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले समय में चुनावों को और अधिक पारदर्शी बना सकता है।